शनि देव से क्यों डरते हो,shani dev se darna kyu?

शनि देव से क्यों डरते हो

हमारे भारतीय ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता
माना गया है। हमे शनि देव से डरने की जरूरत नही है ।कई लोग
शनि देव को बहुत कठोर मानते है । क्योंकि इनके प्रकोप से  बड़े से बड़ा धनवान आदमी भी भिखारी बनजाता है और इनकी ही कृपासे कंगाल आदमी भी धनवान बनजाता है ।ऐसा इसलिए होता है की शनि देव को न्याय करने का अधिकार प्राप्त है और उनका न्याय भेदभाब रहित होता है।
       तो आईये शनि देवके जीवन  से जुड़ी कुछ बाते जानने का प्रयास करते है।

शनि देव का जन्म

हिन्दू धर्म ग्रंथ के अनुसार शनिदेव का जन्म सूर्य देव की दूसरी
शनि देव से क्यों डरते हो,shani dev se darna kyu?पत्नी छाया के गर्भ से हुवा था। शनि देव जब गर्भ में थे तब शनि देव की माता भगवान शंकर के पूजा में इतनी लीन थी की उन्हें अपने खाने पीने की सोने की जागने की सुध ही नही रहती थी ।
जब शनि देब पैदा हुवे तो उनका रंग काला था।शनि देव का काला रंग देखकर सूर्य देव क्रोधित होगये और अपनी पत्नी छाया पर आरोप लगाया कि ये मेरा पुत्र नही है।तभी से शनि देव का अपनी माता से बैर होगया।इसके बाद शनि भी सूर्य के समान 
शक्ति और स्थान प्राप्त करने के लिए भगवान शंकर की पूजा करने लगे और भोलेनाथ के आशिर्वाद से नवग्रह में स्थान प्राप्त कर ली।

शनि देव से जुड़ी कुछ खास बातें

* ऐसा मना जाता है कि शनि देब के अपने पिता सूर्य देव से अच्छे रिश्ते नही है।
* शनि को न्याय का देवता माना जाता है।
* शनिवार को तेल ,काले तिल, और काले कपड़े आदि किसी गरीब को दान करदेने से शनि देव बहुत प्रसन्न होते है।
* धर्म ग्रंथो के अनुसार हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से छुड़ाया था।तभी से हनुमान जी पूजा करने वाले भक्त पर शनि देव  प्रसन्न रहते है और उनको शनि देव कभी नही सताते है।
*शनि देव की चाल बहुत धीमी है इसलिए वो एक राशि मे करीब साढ़े सात साल तक रहते है।
शनि देव अपने माता पिता को क्यों शत्रु मानते है?
शनि देव सूर्य के पुत्र है और इनकी माता का नाम छाया है।ऐसा माना जाता है कि शनि देव का जन्म से ही काला रंग होने के कारण सूर्यदेव ने इन्हें अपनाया ही नही था इसलिए शनि देव अपने माता पिता को अपना शत्रु मानते है।

शनि देव की प्रसन्न करने का उपाय

शनि देव को शनिवार का दिन समर्पति है इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से ,हनुमान चालीसा का पाठ करने से,पीपल पर जल चढ़ाने से, किसी गरीब को खाना खिलाने से,तेल का दान करने से, शनि मंत्र का जप,पाठ आदि करने से शनि देव प्रसन्न होते है।
शनि देव का मंत्र
वैदिक मंत्र-ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:।
लौकिक शोलोक
शनि स्तोंत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम् |
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
                                                   
                                           धन्यवाद................