नया घर या मकान बनाने से पहले

आप हम सभी का यह  सपना होता है कि हमारा भी एक सुंदर सा घर हो। जैसे तैसे जीवन भर मेहनत करके पैसा इकट्ठा करके हम लोग घर भी बनवाते हैं, घर को सुंदर तरीके से सजाते भी है, पर हम लोग यहां पर एक भूल करते हैं घर बनाते समय हम वास्तु का ध्यान नहीं देते ! जिसके कारण हमें भविष्य में बहुत सारी संकटों का सामना करना पड़ता है।
अतः नया घर या मकान बनवाते समय हमें वास्तु का विशेष रुप से ध्यान देना पड़ता है ।अगर हम लोग वास्तु का ध्यान देकर घर बनाते हैं तो घर में कभी अशांति नहीं होती है। हमेशा उस घर में लक्ष्मी का वास होता है ,और भविष्य में आने वाली कठिनाइयों का भी समाधान होता है,इस लिए आज की इस लेख में हम  वास्तु के कुछ विशेष नियम के बारे में बात करेंगे जिस को अपनाने से हमारा जीवन खुशियों से भर जाएगा।

नया घर या मकान बनाने से पहले कुछ ध्यान देने योग्य बातें


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घर का मुख्य दरवाजा  वास्तु शास्त्र यह कहता है कि घर का मुख्य दरवाजा हमेशा पूर्व या उत्तर की तरफ होना चाहिए ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी । घर का दरवाजा कभी भी दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए विशेष रुप से ध्यान देने योग्य बातें कभी भी घर के मुख्य द्वार के सामने बड़े बड़े पेड़ नहीं होना चाहिए ,बिजली का खंभा आदि नहीं होना चाहिए  क्योंकि  सूर्य की  जो सुबह की  किरण हैं वह सीधे घर में नहीं आ पाती। यदि सूर्य की सुबह की कीरणे घर मे नही आएगी तो उस घर मे कभी कोई खुश नही रह पाएगा।

घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए     घर मे मंदिर तो सबके यहां होता है,फिर भी लोग खुश क्यों नही रहते है? लोग घर मे पूजा का स्थान(मंदिर)तो बनाते है पर सही जगह(दिशा) में नही बनाते है, इसलिए उनको लाभ नही मिलता है।

  मेरा एहि कहना है सबसे की जब कोई नया मकान ,दुकान आदि

बनाये तो प्रयास ये करे की मंदिर की जगह हमेसा ईशान कोण(उत्तर पूर्ब) में ही बनवाये।

यदि ऐसा संभब ना हो तो मंदिर पुरब और उत्तर में भी बनवा सकते है।

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वास्तु शास्त्र में दिशा  का अधिक महत्व है

पूर्व दिशा east  दिशा के स्वामी सूर्य देव है जब भी कोई नया मकान बनाते है तो मुख्य दरवाजा इसी दिशा पर ही बनाने की सलाह दी जाती है।

उत्तर दिशा north ऐसा कहा जाता है कि उत्तर दिशा के मालीक  स्वयं कुवेर हे, इसीलिए जितने भी धन रुपए आदि  जो वस्तु  है , जो घर का तिजौरी है। उसको इस सी दिशा में रखना चाहिए, वास्तु शास्त्र में यह भी एक मान्यता है कि उत्तर दिशा को हमेशा खुला रखना चाहिए इस दिशा में कोई भी भारी भरकम वस्तुएं नहीं रहना चाहिए।

ईशान कोण north east ईशान कोण को सभी दिशाओं में उत्तम लाभकारी और शुभ माना गया है , क्योंकि यह दिशा में हमेंसा देवताओं का वास रहता है अतः घर में मंदिर बनाते समय इस दिशा का चयन करना चाहिए इस दिशा को कभी गंदा नहीं रखना चाहिए नहीं तो घर में कभी शांति नहीं होगी।

पश्चिम दिशा west  इस दिशा में  वरुण देव का वास  रहता है । दिशा में भारी भरकम वस्तुएं रखना शुभ माना गया है पश्चिम दिशा में ही शौचालय बाथरुमआदि बनवाना चाहिये।

उत्तर पश्चिम north west उत्तर पश्चिम दिशा  मे स्वयं वायु देव का का वास रहता है इस दिशा में भी स्वयं भारी भरकम वस्तुएं रखा जा सकता है स्नान घर शौचालय भी बनाया जा सकता है।

दक्षिण south इस दिशा के मालिक स्वयं यमराज जी हैं इस दिशा में घर में आए हुए अतिथियों के लिए रहने का कमरा और विद्यार्थी के लिए सोने का  कमरा भी बनाया जा सकता है।

दक्षिण पश्चिम south west इस दिशा का नेतृत्व स्वयं देवी लक्ष्मी करती है । इस दिशा में तिजोरी अलमारी और घर के मुखिया के लिए सोने का स्थान (शयन कक्ष) बनाना उत्तम होता है। ध्यान देने योग्य बात यह इस दिशा में हम जब भी तिजोरी आदि रहते हैं तो हमेशा पश्चिम दीवार से सटाके ही स्थापित करना चाहिए।

दक्षिण पूर्व south east इस दिशा में अग्नि देव का वास रहता है अतः इस दिशा में घर का रसोई घर बनाना सबसे उत्तम होता है ।

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