धनतेरस के पीछे की कहानी ,Story of Dhanteras,Dhanteras 2018

दीपावली की सूचना देता है धनतेरसdhanteras कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हम लोग धनतेरस मनाते हे । धनतेरस dhanteras का दिन बहुत ही खुशियों का दिन है ।लोग धनतेरस dhanteras के दिन एक दूसरे को खुशियां बांटते हैं उपहार आदि देते हैं ।आज के इस लेख में हम धनतेरस dhanteras के विषय में कुछ विशेष चर्चा करेंगे  |


धनतेरस की कथा Story of Dhanteras

About dipawali,story of dhanteras in hindi

जहां देवता और दानव की बात आती है वहां युद्ध होना अनिवार्य  होता है ऐसे ही एक बार राजा बलि के डर से सभी देवता भगवान विष्णु के पास चले गए क्योंकि राजा बलि दानी भी थे घमंडी भी थे उनका ऐसा मानना था संसार में दूसरा कोई नहीं इसी घमंड के कारण स्वर्ग में जितनी संपत्ति थी वह सब दान करते जा रहे थे इसी भय के कारण सभी देवता भगवान विष्णु के पास चले गए देवताओं  की प्रार्थना सुनते हुए भगवान विष्णु ने राजा बलि के अहंकार को दूर करने के लिए वामन अवतार ले लिया | वामन भगवान ठीक उसी यज्ञ स्थल पर पहुंच गए जहां बलि दान कर रहे थे वामन भगवान को देखते ही राजा बलि ने कहा आपको मैं क्या दान करूं, असुरों के गुरु शुक्राचार्य यह बैठे-बैठे सब बातें सुन रहे थे शुक्राचार्य ने बामन भगवान को पहचान लिया और बली को सावधान करते हुए कहा हे बली ये और  कोई नही स्वयं भगवान विष्णु है। विष्णु तुम्हारे कार्य में विघ्न डालने आया है अतः इसको दान देने का संकल्प मत करो । राजा बलि ने शुक्राचार्य से कहा मेरे घर स्वयं नारायण आए हैं कितना बड़ा सौभाग्य है मैं इस को यूंही कैसे जाने दे सकता हूं बली ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी । फिर बलि ने बामन भगवान से कहा आपको क्या चाहिए बामन भगवान ने तीन पग धरती मांगी । बामन भगवान ने दो पग में ही पूरी धरती को अपना बना लिया राजा बलि का अहंकार टूट गया और अंत में एक पैर अपने सिर के ऊपर रखने को कहा। इस तरह से भगवान वामन ने राजा बलि का अहंकार तोड़ा था और जितना राजा बलि ने दान में खर्च कर दिया था उससे कई गुना संपत्ति बामन भगवान ने देवताओं को दे दी ।
            धर्म ग्रंथों के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ उस दौरान कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी में धनवंतरी अपने दोनों हाथों में अमृत का घड़ा लेकर समंदर से उत्पन्न हुए थे।  ऐसा माना जाता है   कि धन्वंतरि और कोई नहीं स्वयं भगवान विष्णु के  अवतार हैं, इसी कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी के  दिन राजा बली का अहंकार टूट गया था और शुक्राचार्य की आंख भी फोड़ी  गई थी और देवताओं की जो संपत्ति राजा बलि ने दान में दिया था।  उससे कई गुना अधिक संपत्ति भगवान् वामन में देवताको को दी इसलिए   पूरे देवता कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन धन्वंतरि की पूजा करते हैं और इसी को ही धनतेरस के रूप में भी मनाया जाता है।दीपावली में दीया क्यों जलाते है , Diwali Ki Rochak Jankari,

भगवान धन्वन्तरी कीऔर भी मान्यताये


भगवान् धन्वन्तरी एक चिकित्सक भी थे धन्वन्तरी का सबसे प्रिय धातु पीतल माना जाता हे ।इसलिए लोग धनतेरस के  दिन पीतल,चादी  आदि के बर्तन खरीदते हे ।भगवन धन्वन्तरी ने ही सबसे पहेले आयुर्वेद की खोज की थी।यह दिन व्यापारियों ,आयुर्वेदिक और  चिकित्सा के लिए अति शुभ माना जाता हे  

भगवान् धनवनरी की और भी कथाये हे  


यमराज की कथा का भी उल्लेख हे एसा माना जाता हे जो लोग धनतेरस के दिन यमराज के लिए दीप दान करता हे उसकी  कभी अकाल मृत्यु नहीं होती हे ,घर में सदा लक्ष्मी का वास होता हे।

लक्ष्मी और गरीब किसान की कथा भी आती हे ।  किसप्रकार माँ लक्ष्मी की कृपा से वह गरीब किसान के सारे कस्ट दूर होगये ।

रजा बली की कथा आदि
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