satyanarayan vrat katha mukhya patra | एसे करे सत्यनारायण व्रत कथा को याद

satyanarayan vrat katha mukhya patra | एसे करे सत्यनारायण व्रत कथा को याद 

सत्यनारायण व्रत कथा में अनेकों पात्र हैं कई बार हमें उन पात्रों का नाम और विवरण सही से याद नहीं रहता है हम अगर सत्यनारायण व्रत कथा के पात्र और उनके विवरण (satyanarayan vrat katha mukhya patra) के

 विषय में थोड़ी जानकारी रख लें तो हमें सत्यनारायण व्रत कथा को समझने में बहुत आसानी होगी।

satyanarayan vrat katha mukhya patra | सत्यनारायण व्रतकथा के मुख्य पात्र और विवरण
satyanarayan vrat katha mukhya patra | सत्यनारायण व्रतकथा के मुख्य पात्र और विवरण 

Main characters and details of the Satyanarayana Vratakatha

जब नारद ने भगवान विष्णु से पूछा कोई ऐसा उपाय व्रत बताइए जिसको करने से  समस्त मानव जाति का कल्याण हो तब भगवान विष्णु ने सत्यनारायण व्रत कथा को कही थी।

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शतानंद ब्राह्मण - इसी पात्र से सत्यनारायण व्रत कथा का प्रारंभ होता है यह एक गरीब दुखी और दरिद्र ब्राह्मण था जिसके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था और सदा इधर-उधर भटकता रहता था।

वृद्ध ब्राम्हण- भगवान विष्णु ने ही वृद्ध ब्राम्हण का रूप धारण किया था शतानंद ब्राह्मण की दयनीय स्थिति को देखकर उन्होंने वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण करके शतानंद ब्राम्हण को सत्यनारायण का व्रत करने के लिए कहा था।

लकड़हारा (लकड़ी बेचने वाला)-  सत्यनारायण का व्रत करने वाला दूसरा पात्र लकड़हारा बहुत ही गरीब था 1 दिन लकड़ी लेकर शतानंद ब्राम्हण के घर पहुंचा जहां उसे सत्यनारायण व्रत के विषय में पता चला फिर सत्यनारायण का व्रत लकड़हारे ने किया और धन-धान्य से परिपूर्ण हुआ।

उल्कामुख राजा - परम सत्यवादी और तेजस्वी राजा सदा परोपकार करने वाला,गरीबो की सेवा करने वाला । प्रमुग्धा नाम की सुंदर पत्नी के साथ पुत्र प्राप्ति के लिए सत्यनारायण व्रत को करने वाला।

साधु (एक बनिया) - इसी बनिया ने  भगवान के सामने शर्त रखी थी पहले मुझे संतान चाहिए  फिर मैं सत्यनारायण भगवान का व्रत करूंगा उल्कामुख राजा जब अपनी पत्नी प्रमुग्धा के साथ भगवान की पूजा कर रहे थे उसी समय इसको सत्यनारायण की महिमा का ज्ञात  हुआ।

लीलावती - बनिया की पत्नी भगवान सत्यनारायण की कृपा से लीलावती ने एक सुंदर कन्या को जन्म दिया था।

कलावती - बनिया और लीलावती की पुत्री जो परम तेजस्वी ज्ञानी और सत्यवादी थी।

वैश्य (साधु बनिया का दामाद)-कलावती जब विवाह के योग्य हुई तो साधु बनिया ने इसी के साथ कलावती का विवाह संपन्न किया था।

 चंद्रकेतु राजा- इन्हीं राजा ने साधु और उसके दामाद वैश्य को झूठे  चोरी के आरोप में कठोर दंड दिया था। साधु बनिया ने  भगवान के सामने शर्त रखी संतान प्राप्ति के पश्चात सत्यनारायण का व्रत करूंगा इस प्रण को उसने पूरा नहीं किया  फलस्वरूप उसको झूठे  चोरी के आरोप में चंद्रकेतु राजा ने दंड दिया।

 दंडी स्वामी- भगवान सत्यनारायण ने दंडी स्वामी का रूप धारण करके बनिया और उसके दामाद की परीक्षा ली थी।

तुंगध्वज राजा- भगवान सत्यनारायण के व्रत के प्रसाद को न खाने वाला प्रसाद का अपमान करने वाला राजा।

सत्यनारायण व्रत कथा के पात्रों का दूसरा जन्म 

वहीं शतानंद दुखी गरीब ब्राम्हण  दूसरे जन्म में सुदामा बनकर पैदा हुआ और भगवान श्री कृष्णा का ध्यान करते हुए परम लोग को चला गया चला गया।

लकड़हारा लकड़ी बेचने वाला दूसरे जन्म में गुहराजा बनकर पैदा हुआ भगवान श्री राम कि सेवा करके मुक्ति को प्राप्त हुआ।

उल्कामुख राजा ही दशरथ बनकर पैदा हुए  श्री रंगनाथ जी की सेवा करते हुए बैकुंठ धाम चले गये।

साधु बनिया राजा मोरध्वज होकर पैदा हुए  इन्होंने अपने शरीर का आधा भाग भगवान को दे दिया और मोक्ष को प्राप्त हो गये।

तुंगध्वज स्वयंभू होकर भगवत प्राप्ति के लिए अनेक धर्म कर्म किये और अंत में परमधाम को चले गए।
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Satyanarayana Vratakatha aarati | सत्यनारायण व्रत कथा आरती


जय लक्ष्मी रमणा स्वामी जय लक्ष्मी रमणा,सत्यनारायण स्वामी बद्री नारायण, स्वामी जन पातक हरना ॐ जय लक्ष्मी  रमणा।

रत्न जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजै,स्वामी अद्भुत छवि राजै नारद करत नीराजन घंटा ध्वनि बाजै ॐ जय लक्ष्मी रमणा।

प्रगट भए कलि कारण दुइजके दरश दिया,स्वामी दुइजके दरश दिया, बुढो ब्राम्हण वन में कंचन महल किया,ओम जय लक्ष्मी रमणा।

 दुर्बल भील कठोरा जिनपर कृपा करी,स्वामी जिनपर कृपा करी। चंद्रचूड़ एक राजा जिनकी विपत्ति हरि,ओम जय लक्ष्मी रमणा।

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तजदीनी,स्वामी श्रद्धा तजदीनी।
सोफल भोगो प्रभुजी फिर स्तुति किनी,ओम जय लक्ष्मी रमणा।।

भाव भक्ति के कारन छिन छिन रूप धर्यो,प्रभु छिन छिन रूप धर्यो,श्रद्धा धारण कीनी,जिनको काज सर्यो।। ओम जय लक्ष्मी रमणा।।

ग्वाल बाल संग राजा बन में भक्ति करी,स्वामी बन में भक्ति करी,मनवांछित फल दिनो दीनदयाल हरी,ओम जय लक्ष्मी रमणा।।

चढ़त प्रसाद सवायो कदली फल मेवा,प्रभु कदली फल मेवा।।
धूप दीप तुलसी से राजी सतदेवा, ओम जय लक्ष्मी रमणा।।

श्री सत्यनारायण जी की  जो आरति गावे स्वामी प्रेम सहित गावे।। भनत शिवानंद स्वामी भजत शिवानंद स्वामी सुख संपति फल पावे।। ॐ जय लक्ष्मी रमणा।।

                                 जाने शरीर पर तिल होना शुभ या अशुभ 
हम आशा करते हैं satyanarayan vrat katha k mukhya patra के नाम जानकर आप को सत्यनारायण व्रत कथा को समझने में काफी मदद मिलेगी धन्यबाद। 
satyanarayan vrat katha mukhya patra | एसे करे सत्यनारायण व्रत कथा को याद satyanarayan vrat katha mukhya patra | एसे करे सत्यनारायण व्रत कथा को याद Reviewed by Ourbhakti on August 21, 2019 Rating: 5

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