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वैज्ञानिक ऋषि मुनि का सच,sanatan dharma mahaan mahapurush

सनातन धर्मं के चार महान महापुरुष की भविष्यवाणी आज सच हुई   sanatan dharma  mahan mahapurush


हमारे ऋषियों ने पहले जो भविष्यवाणी की थी उसको आज का विज्ञान सच मानता है Sanatan dharma के mahaan mahapurush को हम वैज्ञानिक कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी  हमे अपने सनातन धर्म पर गर्व है प्राचीन काल के उन mahaan mahapurush ऋषि मुनीयों को दिल से प्रणाम जिंन्होने भावी पीढ़ी का ध्यान रखते हुये अनेकों भविष्यवाणीया की और वो सभी सच हुई।

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भारतीय ऋषियों के ज्ञान का लोहा पूरी दुनिया मानती है उनकी की गई भविष्यवाणी आज के दौर में सच साबित हुई हैं।

 हमारे देश भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक है शायद इसलिए भी भारत की भूमि को  मुनियों और अवतारों की भूमि भी कहा जाता है । इन ऋषि मुनियों ने ऐसे कई आविष्कार और भविष्यवाणियां की थीं जो आज विज्ञान सच साबित कर रहा है । जानते हैं प्राचीन भारत के mahaan mahapurush ऋषि मनियों के इन आविष्कारों और भविष्यवाणियों के बारे में ।

आचार्यवराहमिहिर
आचार्य वाराह मिहिर महाराज विक्रमादित्य द्वितीय  दरबार के एक रन माने जाते थे । ऐसा माना जाता है कि वाराह मिहिर  ही सबसे पहले ऋषि थे , जिन्होंने दुनिया को ये बता दिया था कि चांद की अपनी कोई रोशनी नहीं है चांद से जो रोशनी निकलती है वो इसे सूरज से मिलती है ।
विज्ञान के इतिहास में यह प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने कहा कि कोई शक्ति ऐसी है जो चीजों को जमीन के साथ चिपकाए रखती है।

 कपिल मुनि
 कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रवर्तक थे  पांचवीं सदी में ही उन्होंने कहा था कि पदार्थ अंतरिक्ष , हवा , अग्नि , जल और पृथ्वी , इन पंचभूतों से बना है और ये सभी पदार्थ अणु - परमाणुओं से बने हैं । महर्षि कणाद का कहना था कि वायु , अग्नि , जल और पृथ्वी चार प्रकार के परमाणु हैं  जिनके कारण अणुओं की रचना होती है ।

 आचार्यभारद्वाज
आज जो आप आसमान में हवाई जहाज और जितने भी मिसाईएले देख रहे हैं वो सब इनकी ही देन हैं। बहुत साल  पहले इन्होंने एक ऐसे ही विमान की कल्पना की थी जो सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह धरती पर ही नहीं बल्कि एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक भी जाया जा सकता हैं । भारदूआज मुनि ने इस तकनीक पर इतने काम किए हैं जिसकी उस समय कल्पना भी नहीं की जा सकती । इनके दुवारा किये गए कामों की चर्चा पुराणों में भी की गई है ।

महर्षि पतंजलि
 दुनिया को सबसे पहले योग सिखाने वाले गुरु यही थे  इन्होंने बहुत साल  पहले इस बात की घोषणा कर दी थी कि योग की मदद से तन और मन दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है ।

पतंजलि मुनि को महान चिकित्सक (doctor) कहा जाता हैं  और इन्हें ही चरक संहिता नामक महान ग्रन्थ का प्रणेता माना जाता है । अष्टांगयोग(यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा ,ध्यान ,समाधि) महर्षिपतंजलि की ही देन है  यह रसायन विद्या में भी माहिर थे।

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