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bhoomi poojan neev puja vidhi | भूमि पूजन की पूरी जानकारी

घर निर्माण करते समय नींव पूजन की विधि,bhoomi poojan neev puja vidhi in hindi

Bhoomi pujan neev pujan vidhi नया घर का निर्माण करते समय हमें नीव पूजन विधि को जानना बहुत जरुरी  है मैंने कई जगह देखा है लोग भूमि पूजन नीव पूजा(bhoomi poojan neev puja) तो करा लेते है लेकिन पूरी बिधि के साथ नहीं करते है उन्हें पता ही नहीं है की नीव की खुदाई करते कैसे है ?(Neev ki khudai kaise kare) भूमि पूजा करते समय क्या क्या सामग्री(bhoomi pujan samagri) चाहिये? नीव में कलश की स्थापना कैसे करे?
bhoomi poojan neev puja vidhi
bhoomi poojan neev puja vidhi
 सबसे महत्वपूर्ण बात नींव हि घर की मजबूती का आधार होता है। नींव  खुदाई करने से पहले किसी योग्य पंडित जी से शुभ मुहूर्त का चयन अवश्य करें। शुभ माह, शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र, शुभ दिशा, शुभ लग्न का निर्णय करने के बाद ही निव पूजन का कार्य  करें।

नींव की खुदाई कैसे करे ,neev ki khudai kaise kare


लोग अक्सर भूमि पूजन में  एक ही गड्ढा ईशान कोण में खोदते है जो कि गलत है।
भूमि पूजन का कार्य पूर्ण हो जाने के बाद सबसे पहले नींव की खुदाई ईशान कोण से ही शुरू करें। ईशान के पश्चात आग्नेय कोण की, आग्नेय के बाद वायव्य कोण फिर नैऋत्य कोण की खुदाई करें। जब कोणों की खुदाई पूरी हो जाये  फिर दिशा की खुदाई करें  पूर्व, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में क्रम से खुदाई करें  ध्यान दे जिस प्रकार से यहाँ लिखा है आपको ठीक वैसे ही करना है।

नींव की भराई ,neev ki bharai kaise kare?


जिस विधि से हमने नीव की खुदाई की है भराई करते समय भी हमे कुछ बातों का ध्यान देना चाहिये।
नींव की भराई, नींव की खुदाई के उल्टे ( विपरीत )क्रम से करें सबसे पहले नेऋत्य कोण की भराई करनी चाहिये फिर  वायव्य, आग्नेय, ईशान कोन की भराई करें। कोण की भराई के बाद दिशाओं में बनाई गई नींव की भराई करें। सबसे पहले दक्षिण दिशा की भराई करें। फिर पश्चिम ,उत्तर और अंत पूर्व दिशा की भराई करें।

नींव पूजन क्यों करें ?,nev pujan kyu kare?

हमारे सनातन धर्म मे नीव पूजन का कार्य इस  विश्वास पर टीका हुआ है कि जैसे शेषनाग अपने फन में पूरी पृथ्वी को धारण किए हुए हैं

ठीक  वैसे ही भगवान मेरे इस घर की नींव  चांदी के नाग के फन पर पूर्ण मजबूती के साथ बना रहे। शेषनाग क्षीरसागर में रहते हैं इसलिए पूजा के कलश में दूध, दही घी डालकर अनेक मंत्रों से पूजन आह्वाहन कर शेषनाग नीव में विराजित  किया  जाता है ।

ताकि शेषनाग स्वयं घर की नीव में रहकर भवन की रक्षा  करें नींव खोदते समय यदि जमीन के अंदर से पत्थर , ईंट आदि निकले तो आयु की वृद्धि होती है उस घर मे बरकत होती हैं।

ऐसे जमीन में मकान कभी नही बनाना चाहिये जिस भूमि में नीव  खोदने पर राख, कोयला, भस्म, हड्डी या कोई गंदी चीज आदि निकले,  फिर भी आप मकान बनाते हैं तो दुख , अल्प आयु , धन का नाश होता हैं।

नींव पूजन में कलश स्थापना कैसे करे,neev pujan me kalash visthapan kaise kare?

bhoomi poojan vidhi in hindi
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नीव पूजन करने से पहले अपने इष्टदेव को स्मरण करें अपनो पितरों का आशीर्वाद ले उसके बाद नियम अनुसार सबसे पहले दीपक गणेश ,पंचदेवों की पूजा करें,  कलश पूजन करे जमीन से पीली सरसों छोड़े,गौमूत्र और गंगाजल से पूरे जमीन में छिड़काउ करे गंगाजल और पञ्चगव्य के छिड़काउ से नीव में स्थित सभी प्रकार का दोष दूर हो जाता है। इतना सब करने के बाद ही नीव पूजन का कार्य शुरू करें।

नींव पूजन में तांबे का कलश स्थापित किया जाना चाहिए। कलश के अंदर चांदी के दो सर्प नाग नागीन का जोड़ा,  हल्दी की पांच गांठे, पान के 11 पत्तें, मिट्टी के 11 दीपक,लोहे की चार कील, छोटे आकार के पांच औजार, सिक्के, आटे की पंजीरी, फल, नारियल, गुड़, पांच चैकोर पत्थर, शहद, जनेऊ, राम नाम पुस्तिका, तुलसी की 35 पत्तियों, पंच रत्न, पंच धातु रखना चाहिए। सभी सामग्री को कलश के अंदर रखकर कलश का मुह लाल कपड़े से बांधकर नींव में स्थापित कर दे।

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