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vastu shastra ke anusar kaha kya hona chahiye

vastu shastra ke anusar kaha kya hona chahiye?


आप को बता दे वास्तु शास्त्र के अनुसार(vastu shastra ke anusar) सही दिशाओं को जानना ही वास्तु हैं यह एक ऐसा तरीका  है, जिसमें दिशाओं को ध्यान में रखकर मकान निर्माण व उसकी सजावट किया जाता है। आइये जानते हैं vastu shastra anusar kaha kya hona chahiye,वास्तु के अनुसार किस प्रकार अपना मकान जमीन होटल आदि का चयन करना चाहिये ।
vastu shastra ke anusar kaha kya hona chahiye
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ऐसा कहा जाता है कि वास्तु के अनुसार घर निर्माण करने पर घर-परिवार में खुशहाली छा जाती है।वास्तु शास्त्र में दशों दिशाओं का बड़ा ही महत्व है

अगर आपके घर गलत दिशा में किसी चीज का निर्माण होगा तो उससे आपके परिवार को  हानि होगी उस घर मे शांति कभी नही होगी, वास्तु शास्त्र यही कहता हैं ।
आज हम वास्तु शास्त्र से सम्बंधित निम्न बातों पर जानेंगे -

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ऐसा कहा जाता है कि वास्तु के अनुसार घर निर्माण करने पर घर-परिवार में खुशहाली छा जाती है।वास्तु शास्त्र में दशों दिशाओं का बड़ा ही महत्व है

अगर आपके घर गलत दिशा में किसी चीज का निर्माण होगा तो उससे आपके परिवार को  हानि होगी उस घर मे शांति कभी नही होगी, वास्तु शास्त्र यही कहता हैं ।
आज हम वास्तु शास्त्र से सम्बंधित निम्न बातों पर जानेंगे -


 वास्तु में दशों दिशाओं का बहुत महत्व  हैं नया घर बनाते समय  जिन्हें ध्यान में रखना बहुत जरूरी  है।

vastu ke anusar kaha kya hona chahiye,वास्तु के अनुसार कहा क्या होना चाहिये 

vastu shastra ke anusar kaha kya hona chahiye
vastu shastra ke anusar kaha kya hona chahiye 
उत्तर दिशा इस  में सबसे ज्यादा खिड़की और दरवाजे बनाना  चाहिए। बालकनी और वॉश बेसिन भी इसी दिशा में होना चाहिए

उत्तर दिशा में  वास्तुदोष होने से धन की हानि व करियर सेटलमेंट में बहुत बाधाएँ आती हैं। इस दिशा की भूमि का ऊँचा होना वास्तु शास्त्र में बहुत हु शुभ माना गया हैं।

दक्षिण दिशा  की भूमि भी नियम अनुसार ऊँचा होना चाहिए  इस दिशा की जमीन के ऊपर अधिक वजन रखने से घर का मुख्या सुखी, समृद्ध व स्वस्थ्य हो जाता है।

धन दौलत को यदि इस दिशा में रखने से उसमें बढ़ोतरी होती है दक्षिण दिशा में किसी प्रकार का खुलापन, शौचघर व गंदगी नहीं होना चाहिए।

पूर्व दिशा भगवान सूर्य की दिशा मानी जाती है पूरब की दिशा से ही सूर्य की सकारात्मक  किरणें हमारे घर में आती हैं।

घर केमुख्या की लंबी आयु साथ ही  घर परिवार के लिए घर के मुख्य द्वार, खिड़की आदि का इस दिशा में होना बहुत शुभ माना गया है।

पढ़ने वाले बच्चों को भी पूरब दिशा की ओर मुख करके पढ़ाई करना चाहिए इस दिशा में दरवाजे पर मंगलकारी भगवान गणेश की व रिद्धि  सिद्धि की फ़ोटो लगाना शुभ माना गया है।


पश्चिम दिशा  इस दिशा की भूमि का भी प्राकृतिक रूप से ऊँचा होना आपकी उन्नति सफलता व कीर्ति के लिए बेहद शुभ संकेत है आपका रसोईघर व टॉयलेट इस दिशा में बनाना चाहिए।

उत्तर-पूर्व दिशा  इस दिशा को भगवान का निवास स्थान बोला जाता हैं ईशान कोण के नाम से जानी जाने वाली यह दिशा जल की दिशा  है।

इस दिशा में बोरिंग  पूजास्थल भगवान की फोटी आदि रखना चाहिए। घर के मुख्य द्वार का उत्तर पूरब(ईशान कोण) दिशा में होना वास्तु की दृष्टि से बेहद शुभ माना गया है।


उत्तर-पश्चिम दिशा इसको वायव्य कोंन भी कहा जाता हैं  घर में नौकर,कर्मचारी है तो उनका कमरा इसी दिशा में ही होना चाहिए इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज ,मरम्मत की वस्तु  आदि होना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व दिशा  यह अग्निदेव की दिशा है इसको आग्नेय कोंन के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिशा में गैस, बॉयलर, ट्रांसफॉर्मर,जितनी भी भारी वस्तु है उन्ही को रखना चाहिए।

दक्षिणपश्चिम दिशा - इस दिशा को ‘नैऋत्य दिशा’ बोला जाता हैं यह दिशा खुला नही होना चाहिये जैसे- खिड़की, दरवाजे बालकुनी आदि ।

गृहस्वामी का कमरा इस दिशा में होंतो बरकत अच्छी होती है धन तिजोरी  का स्थान, मशीनादि इस दिशा में रखने से शुभ होता हैं ।


पहले जमाने में घर वास्तु शास्त्र के अनुसार(vastu shastra k anusar) बनाया जाता था, जिससे घर में हर प्रकार की खुशी रहती थी। आज के आधुनिक जमाने मे किसी के पास समय नही है। जिंदगी में तनाव और चिंता है  और इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए हम कई प्रकार के उपाय करते रहते हैं ।


हम आपको बतादे वास्तुशास्त्र चिंता व परेशानियों से छुटकारा पाने का एक अच्छा तरीका हैं वास्तु की छोटी छोटी बातें ध्यान में रखकर

हम अपने जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा , जब हम वास्तु में बताई गई बातों को अमल करके अपने व्यवहार लाये।

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वास्तु शास्त्र में दिशा का महत्व

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घर या कार्यालय का निर्माण करते समय आठों दिशाओं का हमेसा ध्यान रखना चाहिए अगर सहीं दिशाओं का चयन न होतो कोई भी खुश नही रह सकता गलत दिशा का चयन दुख का मुख्य कारण हैं

 कोई भी काम सही-सही नहीं हो सकता वास्तु से संबंधित कोई भी कार्य करने से पहले किसी योग्य जानकार व्यक्ति का सहारा जरूर ले।

वास्तु  की मदद से हम ज्यादा-से ज्यादा तेजवान शक्तिमान बन सकते हैं घर मे स्थित वास्तु की सकारात्मक ऊर्जा कर्म के साथ साथ सोये हुए भाग्य को  जगाने में भी सहायक होती हैं।

दिशाओं के विषय में कुछ रोचक तथ्य

उत्तर दिशा से हमेशा चुम्बकीय तरंग  घर में प्रवेश  हैं चुम्बकीय तरंगे इंसान के शरीर में बहने वाले रक्त संचार और स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा प्रभावित करती हैं।

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उत्तर दिशा का प्रभाव अधिक बढ़ जाता हैं। सेहत के साथ साथ ही यह दिशा धन को भी वृद्धि करती  हैं। इस दिशा में कुछ भी बनाने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हैं ।

उत्तर दिशा की जमीन तुलनात्मक रूप से नीचे की और झुका होना चाहिए तथा बालकनी भी इसी दिशा में कराना चाहिए। घर का बरामदा पोर्टिको,वाश बेसिन भी उत्तर दिशा में बनाना चाहिए।


उत्तर-पूर्व दिशा सबसे पवित्र दिशा हौ इस दिशा में परमात्मा का निवास होने के कारण उत्तर-पूर्व दिशा दो प्रमुख ऊर्जा का समागम हैं।

उत्तर दिशा और पूर्व दिशा दोनों इसी स्थान पर मिलते हैं अत इस दिशा में चुम्बकीय तरंगों के साथ आकाश का ऊर्जा भी मिलता हैं।

इसलिए इसे देवताओं का स्थान अथवा ईशान कोण की दिशा भी बोलते हैं। इस दिशा में अधिक से अधिक खुला स्थान होना चाहिए।

नलकूप ,स्वीमिंग,जल से संबंधित सभी वस्तु इसी दिशा में निर्माण कराना चाहिए। घर का मुख्य द्वार इसी दिशा में शुभ होता हैं।


पूर्व दिशा सौर से सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं अतः भवन निर्माण करते समय इस दिशा में ज्यादा से ज्यादा खुला स्थान होना चाहिए।

पूर्वदिशा में भूमि का थोड़ा झुकाव नीचे की और होना चाहिए। दरवाजा,खिडकियां भी इसी दिशा में बनाना सही रहता हैं।बरामदा, बालकनी और वाशबेसिन आदि इसी दिशा में रखना चाहिए। बच्चे भी इसी दिशा में मुख करके पढ़ाई करें तो अच्छे नंबर प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तर-पश्चिम दिशा में भोजन करने का स्थान बनाएं यह दिशा वायु का स्थान है अतः भवन निर्माण में गौशाला बेडरूम गैरेज आदि इसी दिशा में बनाना शुभ होता है घर के नोकर का कमरा भी इसी दिशा में बनाना चाहिए।

पश्चिम दिशा में शौचालय(टायलेट) बनाएं यह दिशा सौर ऊर्जा की विपरित दिशा हैं अतः पश्चिम दिशा को ज्यादा बंद ही रखना चाहिए।

ओवर हेड टेंक इसी दिशा में बनाना चाहिए। भोजन कक्ष भी इसी दिशा में होना चाहिए। पश्चिम दिशा में घर और भूमि तुलनात्मक रूप से ऊँची होना बहुत आवश्यक है।
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दक्षिण-पश्चिम इस दिशा को राक्षस( नैऋत्व) दिशा के नाम से संबोधित किया गया हैं। घर के मुखिया का कक्ष इसी दिशा में बेहतर माना गया हैं।

 उपर जाने के लिये सीढ़ियों का निर्माण भी इसी दिशा में करना। इस दिशा को पूरी तरह बंद रखे तथा इस दिशा में खिड़की, दरवाजे आदि बिल्कुल न बनाये।

एक बात और यह पर किसी प्रकार का शौचालय गड्ढा अथवा नलकूप का निर्माण कभी न करें।

दक्षिण-पूर्व (आग्नेयदिशा) इस तरफ  सेप्टिक टेंक किचिन  बनाना सबसे उत्तम माना गया है। आग्नेय दिशा अग्नि तत्त्व प्रधान होती हैं अतः इस दिशा में आग से संबंधित काम जैसे- किचिन, ट्रांसफार्मर, जनरेटर  आदि होना चाहिए सेप्टिक टेंक भी आग्नेय दिशा में बनाना बेहतर होता हैं।


दक्षिण दिशा यमराज की दिशा है अतः इस दिशा में पैसा रखना सबसे उत्तम होता हैं घर भी इस दिशा की तरफ  ऊंचा होना चाहिए। फैक्ट्री में जितने भी मशीने हैं इसी दिशा में लगाना चाहिए।

वास्तु शास्त्र में दिशाओ का महत्व
यदि हम वास्तु शास्त्र को दिशाओ का  विज्ञान भी कहे तो भी कोई अतिसयोक्ति नही होगी वास्तु को जानने के लिए सबसे पहले हमें दिशाओं को समझना होगा।

हम सब जानते हैं इस पृथ्वी में मुख्य में आठ दिशाएँ  हैं जो इस प्रकार है –

 पूर्व, ईशान, उत्तर, वायव्य, पश्चिम, नैऋत्य, दक्षिण व आग्नेय अगर ऊपर आकाश व नीचे पाताल दिशा को भी मिला दिया जाए तो कुल 10 दिशायें होती हैं




पहले जमाने में वास्तु दिशा का चयन प्रातःकाल या मध्याह्न के पश्चात एक बिन्दी पर एक छड़ी लगाकर सूर्य की रश्मियों द्वारा पड़ रही छड़ी का छाया के आधार पर किया जाता था।

लेकिन आजकल विज्ञान का दौर हैं हर किसी के हाथ मे स्मार्ट फ़ोन हैं इसलिये आज के जमाने मे सही दिशा का चयन करना कोई मुश्किल काम नही हैं।

स्मार्टफोन के लगे कंपास की मदद से आप सही वस्तु दिशा का चयन आसानी से कर सकते हो।

rashi anusar kare sahi vastu niwas ka chayan
राशि के अनुसार करें सही निवास स्थान का चयन

rashi anusar kare sahi vastu niwas ka chayan, राशि के अनुसार करें सही निवास स्थान का चयन

अपने निवास स्थान का चयन करते वक़्त लोग दुविधा में पड जाते  है कही यह घर उसके लिए  अशुभ तो नहीं होगा

 इस शंका  को मिटाने के लिए निवास स्थान(आप जहाँ रहने वाले हैं) कालौनी, गाऊँ या शहर के नाम के पहले अक्षर से अपनी जन्मराशि  का मिलान करने के पश्चात ही शुभ स्थान का चयन करना चाहिये।

जैसे-आपकी जन्म राशि और आप जहाँ रहने वाले है वो राशि एक ही होना चाहिये।ध्यान दे  दोनों रशिया एक दूसरे से 6-8 या 3,11 पड़े तो धन में बाधा और 2-11 होने से रोग,चिंता,अति कस्ट होती है।

असपके जन्म राशि से ये राशियां होती बहुत शुभ

आप के जन्म राशि से 1-4-5-7-9/10 राशियां हो तो वास्तु के अनुसार बहुत अनुकूल मानी गई है। इसको आप इस उदाहरण से समझ सकते हैं-

जैसे आपकी राशि वृष है और जवलपुर में आप घर खरीद रहे है तो यह आपके लिए शुभ रहेगा। क्योंकि वृष राशि से गिनने पर जवलपुर की 9 वा मकर राशि और  मकर राशि से गिनने पर वृष 5वीं राशि पड़ेगी।

इसका मतलब यह हुआ निवासकर्ता और निवास स्थान की राषियों में  9,5 का अंतर होने के कारण शुभ संयोग बनेगा।

इसको जानने के और भी कई तरीके हैं बहुत सारे वास्तु शास्त्री इसकी गणना नक्षत्र से भी करते हैं।
निवास स्थान के नक्षत्र से जातक का नक्षत्र  एक,दो,तीन,चार पड़े तो अपार धन।
छ,सात,आठ पड़ने पर धन ही हानि।
नौं, दस,गयारह  नक्षत्र पढ़ने  पर कई जगह से पैसा आने के रास्ते खुल जाते हैं।


यदि जातक का नक्षत्र चौदह,पंद्रह, सोल, सत्र, अठारह और उन्नीस वां हो तो अपने जीवनसाथी को चिंताओ का सामना करना पड़ता है।

निवासकर्ता व्यक्ति का नक्षत्र यदि बिस वां हो तो सबसे घातक होता है।
 यदि निवास कर्ता का नक्षत्र 21, 22, 23, 24, हो तो ऐशो आराम में वृद्धि में  होती है।

25, 26 ,27 वां हो तो अपने रिश्तेदार भाई बहन मामा तथा परिजनों के लिये बहुत ही अशुभ होता हैं। अपने सपने लेकर हम नया घर बनाते हैं

अतः मकान का निर्माण करते समय हमें बहुत ही सावधानी से सही स्थान का चयन करना चाहिए तभी जाकर उस व्यक्ति के लिये( निवासकर्ता) के लिए वह घर श्रेष्ठ फल प्रदान करता है।

घर मे सीढ़ियों का निर्माण करते समय ध्यान देने योग्य बातें

वास्तु के अनुसार घर या मकान में सीढ़ी  पूर्व या दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए।  अगर सीढ़ियाँ मकान के  दक्षिण पश्चिम भाग की दाईं तरफ हो तो बहुत बढ़िया।

आप यदि घर या मकान में घुमावदार सीढ़ियाँ बनाने की सोच रहे हैं तो आपको यह जान लेना बहुत जरूरी है कि सीढ़ियों का घुमाव हमेशा पूर्व से दक्षिण की ओर, दक्षिण से पश्चिमओर, पश्चिम से उत्तर की ओर उत्तर से पूर्व की ओर रखें।

सीडियों में चढ़ते समय सीढ़ियाँ हमेशा बाएँ से दाईं ओर मुडी हुई होनी चाहिए। सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम होना चाहिये। एक आसान सा सूत्र  है- घर बानने वाली सीढ़ियों की संख्या को 3 से विभाजित करें तथा शेष 2 रखें

यदि किसी कारणवश घर के सीढ़िया वास्तु अनुसार गलत हुई हो तो सीडियों को तोड़ने की जरूरत नही हैं  आपको वास्तु दोष दूर करने के लिए एक छोटा सा उपाय करना हैं दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक कमरा बना दीजिये।

vastu shastra ke anusar kimti saman kaha rakhe
वास्तु के अनुसार नकदी कीमती सामान कहा रखे?


वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में तिजोरी, पैसानकदी, कीमती आभूषण सोना आदि हमेशा उत्तर दिशा में रखना शुभ माना गया है।

 क्योंकि कुबेर (जो धन सम्पत्ति के कारक देवता हैं) का वास उत्तर दिशा में होता है इसलिए उत्तर दिशा की ओर कीमती वस्तुए रखने से उसकी वृद्धि होती है।

अगर वास्तु से सम्बंधित कोई बात छूट गया हो तो आप कमेंट में पूछ सकते हैं इस छोटे से लेख में हमने वास्तु शास्त्र के अनुसार कहा क्या होना चाहिए से सम्बंधित हर बात को  बताने का प्रयास किया है हम आशा करते हैं आप को ये जानकारी पसंद आई होगी।

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