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vaastu anusaar shauchalya ki sahi disha

vaastu anusaar shauchalya ki sahi disha

शौचालय का वास्तु इस बात  को सुनकर बहुत लोगों को हँसी भी आती है उन्हें ये लगता होगा भला टॉयलेट का कैसा वास्तु ! मैंने तो यहाँ तक सुना है जिस स्थान में मल मूत्र त्याग किया जाता हो उस स्थान में कैसा वास्तु जहाँ मर्जी शौच  करो क्या फर्क पड़ता है। वास्तु अनुसार शौचालय(vaastu anusaar shauchalya) बनाने की कोई जरुरत नहीं है 

vaastu anusaar shauchalya ki sahi disha
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लेकिन हम आपको बता दे वास्तु शास्त्र  एक विज्ञान है जो हर मानव के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वास्तु में बताये गए नियमों का पालन करने से विपत्ति नहीं आती है।

वास्तु सभी जगह काम आता है हमारा आज का विषय है शौचालय आज हम सिर्फ इसी के बारे में बात करेंगे शौचालय भी वास्तु के हिसाव से दिशाओ को ध्यान में रखकर ही बनाना चाहिये।


शौचालय का विचार तभी करना चाहिये जब आप नया घर बनाते समय घर का नक्शा तैयार करते है । अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको स्वयं ऐसा लगेगा कि सब ठीक है कोई परेशानी नही है।

हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी के द्वारा शुरू किया हुआ स्वच्छ भारत अभियान भी शौचालय को अधिक महत्व दे रहा है। जब आप टॉयलेट बना ही रहे है तो क्यों न वास्तु के नियमो को ध्यान में रखकर बनाइये इसमे आपका कोई घाटा नही है बल्कि फायदा ही फायदा है

 पहले के जमाने मे  लोग किसी भी दिशा में शौचालय बना लेते थे लेकिन उनका टॉयलेट घर से काफी दूर होता था इसलिए उतना दोष भी नही लगता था।अब ऐसा नही है आजकल लोग अपनी सुविधा के लिए घर के अंदर ही कमरे से अटेच करके बना लेते है। ऐसे में हमे नियमों का पालन जरूर करना चाहिये।

 वास्तु के अनुसार शौचालय की दिशा कोनसी है?
Vastu k anusar shauchalya ki sahi disha kya hai?


चाहे आप टॉयलेट(शौचालय) घर के बाहर बनाये या अंदर हमेशा घर के दक्षिण – पश्चमी दिशा के बीच में बनवाना चाहिये।वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय की सही दिशा (vaastu anusaar shauchalya ki sahi disha) यही है। दिशाओं का ज्ञान करना पहले जितना मुश्किल था अब नही है हमारा विज्ञान बहुत तरक्की कर चुका है ।

आप सही दिशा का चयन अपने स्मार्ट फ़ोन से कंपास की मदद से आसानी से कर सकते है। किसी पंडित या वस्तु शास्त्री को बुलाने की जरूरत नही है। फिर भी आप को वास्तु से संबंधित किसी भी विषय मे सहायता चाहिए तो आप हमें वेझिझक संपर्क कर सकते है। आपसे किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नही लिया जायेगा।

क्या फायदा होता है दक्षिण – पश्चमी दिशा में शौचालय(टॉयलेट)बनाने से?

vaastu anusaar shauchalya banane ke phayde


   दक्षिण – पश्चमी दिशा विसर्जन की दिशा है त्याग करने का स्थान है ऐसी मान्यता है कि इस दिशा में रखी वस्तु का दुवारा इस्तेमाल नही करना चाहिये क्यों कि ये काल पुरुष के अंग का निचला हिस्सा है। शौच एक गंदगी है इसलिए इसको त्याग करने का सबसे अच्छा स्थान यही है।

वास्तु के हिसाव से कहा टॉयलेट नहीं बनाना चाहिये 
vastu shastra ke hisab se kaha toilet nahi banaana chahiye

शौचालय का निर्माण करते समय आपने थोड़ी बहुत गलती की है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है उनको कुछ उपायों के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।लेकिन वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी दिशाएं भी हैं जिन पर भूलकर भी टॉयलेट नहीं बनाना  चाहिए।


  • ईशान कोण में शौचालय भूलकर भी नहीं बनाना चाहिए।
  • आग्नेय कोण में भी टॉयलेट का निर्माण नहीं करना चाहिए।
  • पूर्व दिशा में टॉयलेट का निर्माण करने से घोर विपत्ति घर में आती है।
  • घर के बीच में  शौचालय बनाना अशांति का कारण बन सकता है।
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