पुरुषोत्तम महीने में एकादशी व्रत रखना मान्य है या पाप? जानें इसके पीछे का असली सच!
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हिंदू धर्म में व्रतों और त्योहारों का अपना एक अलग ही उत्साह होता है। लेकिन जब बात पुरुषोत्तम मास (जिसे हम आम बोलचाल में मलमास या अधिकमास भी कहते हैं) की आती है, तो मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं।
अक्सर लोग सोचते हैं कि इस महीने में तो सारे मांगलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह, मुंडन या गृह प्रवेश रोक दिए जाते हैं, तो क्या इस दौरान आने वाली एकादशी का व्रत रखना मान्य होगा? क्या इसका फल मिलेगा या यह व्यर्थ चला जाएगा?
क्या मलमास (अधिकमास) में किए गए व्रत-उपवास व्यर्थ चले जाते हैं?
अगर आपके मन में भी यह उलझन है, तो चलिए आज इसे बिल्कुल सरल शब्दों में समझते हैं। सीधा जवाब: क्या यह व्रत मान्य है?
जी हाँ, बिल्कुल मान्य है! सिर्फ मान्य ही नहीं, बल्कि ज्योतिष और पुराणों के अनुसार पुरुषोत्तम महीने में पड़ने वाली एकादशी का व्रत रखना आम दिनों की एकादशी से कहीं ज्यादा फलदायी माना गया है।
यह कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही खूबसूरत पौराणिक कथा और लॉजिक है। आइए जानते हैं क्यों।
पुरुषोत्तम मास की एकादशियों का खास नाम और महत्व
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस विशेष महीने की एकादशियों के अपने खास नाम हैं। अधिकमास में दो एकादशी आती हैं:
पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)
परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष)
भगवान विष्णु का सीधा कनेक्शन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास को पहले बड़ा ही उपेक्षित माना जाता था क्योंकि इसका कोई स्वामी ग्रह या देवता नहीं था। तब भगवान विष्णु ने दया करके इस महीने को अपना नाम दिया—"पुरुषोत्तम"।
भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति इस महीने में मेरी पूजा, उपासना या व्रत करेगा, उसे अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य मिलेगा। चूंकि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है, इसलिए इस महीने में एकादशी व्रत करने का महत्व अपने आप ही सातवें आसमान पर पहुंच जाता है।
इस व्रत को करने के फायदे क्या हैं?
अगर आप पुरुषोत्तम मास की एकादशी का व्रत रखते हैं, तो आपको इसके कई मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं:
पापों से मुक्ति: ऐसा माना जाता है कि जाने-अनजाने में हुए बड़े से बड़े कष्ट और पाप इस व्रत के प्रभाव से कट जाते हैं।
अक्षय पुण्य की प्राप्ति: 'अक्षय' का मतलब होता है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। इस महीने किए गए व्रत का पुण्य कभी खत्म नहीं होता।
बढ़ती है सुख-समृद्धि: घर में चल रही तंगी या मानसिक अशांति को दूर करने के लिए पद्मिनी और परमा एकादशी का व्रत रामबाण माना गया है।
व्रत करते समय किन बातों का ध्यान रखें? (सरल नियम)
अगर आप पहली बार यह व्रत रख रहे हैं या असमंजस में हैं, तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें:
नियम सरल हैं: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, भगवान विष्णु या बाल गोपाल के सामने दीया जलाकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन मन को शांत रखें, किसी की बुराई न करें और सात्विक रहें।
अगर आपकी सेहत इजाजत नहीं देती, तो आप फलाहार (फल और दूध) लेकर भी यह व्रत रख सकते हैं। भगवान भाव देखते हैं, आपकी भूखी काया नहीं। अगले दिन (द्वादशी को) शुभ मुहूर्त में पारण करके व्रत को पूरा करें।
चलते-चलते...
तो अगली बार जब भी अधिकमास या पुरुषोत्तम महीना आए, तो मन में यह शंका बिल्कुल मत लाइएगा कि व्रत रखना चाहिए या नहीं। यह महीना तो भगवान की भक्ति का 'बोनस हफ्ता' है! इस समय की गई छोटी सी पूजा भी बड़ा फल देती है।
पूरी श्रद्धा के साथ पुरुषोत्तम महीने की एकादशी का व्रत करिए। भगवान विष्णु की कृपा आप पर जरूर बरसेगी।
जय श्री कृष्ण!
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