Hartalika Teej 2022 | हरतालिका तीज महिलावो के लिये क्यों जरुरी - Our bhakti- ज्योतिष,राशिफल,व्रतकथा,हिन्दु धर्म,

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Hartalika Teej 2022 | हरतालिका तीज महिलावो के लिये क्यों जरुरी

 Hartalika Teej 2022| हरतालिका तीज की पूरी जानकारी पूजा विधि  व्रत कथा  मुहूर्त 


शिव और पार्वती की पुन: मिलन की याद में हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2022)  बड़े ही धूमधाम से पूरे देश अपितु विदेशों में भी मनाया जाता है ।
Hartalika Teej 2019  हरतालिका तीज कब है 2019, जानिए पूजा विधि  व्रत कथा और मुहूर्त
Hartalika Teej 2022  हरतालिका तीज जानिए पूजा विधि  व्रत कथा और शुभ मुहूर्त 

हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का अपना एक महत्व है सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु,आरोग्य के लिए दिनभर भूखी रह कर इस व्रत को बड़े ही श्रद्धा भाव से करती है  हरतालिका तीज के दिन हर सुहागिन महिलाएं अपने आप को दुल्हन की तरह सजाती है।


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सुहागिन स्त्रियों के अलावा हरतालिका तीज व्रत अविवाहित लड़कियां भी बड़ी लगन से करती है ताकि उन्हें भविष्य में सुंदर दूल्हा मिले, जो उनका पूरी तरह से ख्याल रखें।

ऐसी भी मान्यता है जिस लड़की की शादी करने की उमर हो गई मगर शादी नहीं हो पा रही कुछ ना कुछ बाधाएं आ जाती है,ऐसे में अगर वह लड़की हरतालिका (Hartalika Teej)  का व्रत पूरी लगन से करें तो उसकी शादी बहुत जल्दी होती है।

इस पर्व को हर एक स्त्री बहुत ही समर्पण भाव से करती हैं क्योंकि हरतालिका तीज के  पर्व को करने के पीछे उनके पति का जीवन जुड़ा हुआ है । वे ऐसा मानती है कि अगर हम हरतालिका तीज को विधि विधान से सम्पन्न करेंगे तो हमारे पति के ऊपर कोई आंच नही आयेगी।

Hartalika Teej 2022 : हरतालिका तीज कब है जानिए पूजा विधि  व्रत कथा और मुहूर्त 

hartalika:इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दुबारा मिलन हुआ था
hartalika:इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दुबारा मिलन हुआ था 

हरतालिका तीज का त्योहार इसीलिए भी महत्वपूर्ण हे क्योंकि  इस व्रत को स्वयं माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इसलिये माँ पार्वती को तीज की माता कहते हैं।

 इतनी बातें जाने के बाद हमारे मन में एक प्रश्न तो जरुर आया होगा इस व्रत में ऐसी कौन सी बात है जिसको महिला इतनी ज्यादा प्राथमिकता देती है। हरतालिका तीज का व्रत करने के लिए पूरी बेसब्री से 1 वर्ष तक इंतजार करती हैं चलिए जानते हैं हरियाली तीज की कथा ।

हरतालिका का अर्थ क्या हैं hrtalika ka arth kya hain


माता पार्वती जब शिव की पूजा कर रही थी उसी समय पार्वती की सखियों ने उनका अपहरण किया था इसलिए भी इस पर्व को हरतालिका (Hartalika) तीज कहा जाता हैं।

हरत शब्द "हरण" शब्द से बना है और हरण का अर्थ होता है अपहरण करना "आलिका" का अर्थ होता है सखी ।माता पार्वती को उनकी सखियों द्वारा  हरण करना मतलब हरतालिका (hartalika) होता हैं 


इस पर्व को  "हारतालिका" इसीलिए कहते हैं क्योंकि यह एसा समय हैं जब प्रकृति में चारो तरफ हरियाली होती हैं और प्रकृति पुरे जोश में होती हैं जिसको देखकर हर कोई इसकी और आकर्षित हो जाता हैं इसलिए इस पर्व को हरतालिका कहते हैं।

हरतालिका तीज व्रत कथा | hartalika teej vrat katha in hindi

एक समय की बात है जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था पांडवों को हस्तिनापुर का राज्य मिल गया था भगवान श्री कृष्ण अपने धाम द्वारका लौट चुके थे कुछ समय बीत जाने के पश्चात श्री कृष्ण पांडवों का हालचाल जानने के लिए पुनः हस्तिनापुर आ गए पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण का आदर सत्कार किया उनका आतिथ्य  किया।

तब महारानी द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से एक प्रश्न पूछा हे कृष्ण आप तो परमेश्वर हैं  सब जानते हैं  आप हमें ऐसा उपाय बताइए जो सभी सुहागिनऔर अविवाहिता नारियों के लिए सुलभ हो जो सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति दिलाने वाला हो  मनोवांछित फल देने वाला हो जिसको  करने से सभी स्त्रियां धर्म के मार्ग पर चलें सके ।

द्रोपदी की यह बात सुनकर भगवान श्री कृष्ण प्रसन्नता के साथ बोले  मैं तुम को प्रणाम करता हूं क्योंकि तुमने  अपने लिए नहीं बल्कि सभी स्त्री जाति के लिए प्रश्न किया है अब मैं तुम्हें हरतालिका तीज व्रत का कथा सुनाता हूं जिसको करने से सभी स्त्रियां पाप मुक्त हो जाएंगी और मनोवांछित फल मिलेगा।

हरतालिका तीज व्रत कथा | hartalika teej vrat katha
हरतालिका तीज व्रत कथा | hartalika teej vrat katha

 हारतालिका  तीज व्रत में भगवान शंकर और मां पार्वती की पूजा होती है भगवान् शिव आशुतोष हैं और थोड़े से पूजा करने भर मात्र  से भगवान शिव  बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और सौभाग्य प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं।

हरतालिका तीज व्रत कथा | hartalika teej vrat katha

 जब  पर्वतराज हिमालय ने  मानव  शरीर धारण करके मैना नामक स्त्री से शादी किया कुछ समय बीत जाने के पश्चात उनके घर एक सुन्दर लड़की ने जन्म लिया जिसका नाम उमा रखा गया ,पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उनका  नाम पार्वती हो गया।

 एक दिन अचानक देवर्षि नारद घूमते घूमते पर्वतराज हिमालय के घर पहुंच गए  देवर्षि नारद  को अपने घर देख पर्वतराज हिमालय ने देवर्षि नारद का आदर सत्कार आतिथ्य किया फिर हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती को बुलाया और नारद से कहा हे मुनि आप तो  त्रिकालदर्शी हैं अतः आप मेरी पुत्री पार्वती का भविष्य बताइए।

 नारद ने कहा हे पर्वतराज आप की पुत्री सर्वगुण संपन्न है लेकिन  इसकी  शादी किसी राजकुमार से नहीं होगी बल्कि इसकी शादी  किसी परिवारविहीन, उदासीन, तपस्वी,  योगी  के साथ  होगी इस बात को  कोई नहीं टाल सकता यह विधि द्वारा पहले से ही लिखा जा चुका है इसलिए में एक उपाय बताता हु जिसको करने से आप की पुत्री का विवाह भगवन शिव के साथ होगा फिर आप की पुत्री पार्वती जगत जननी कहलाएंगी ।

यदि आपकी  पुत्री पार्वती भगवान शंकर का ध्यान करते हुए  निरंतर शिव की पूजा करती हैं तो आप की पुत्री का विवाह भगवान शिव के साथ होगा इतना कहकर नारद जी वहां से चले गए।

 नारद बात सुनकर पार्वती उसी क्षण घनघोर वन में चली गई और शिव का नाम लेते हुये अनेकों वर्षों तक कठोर तप करने लगी ।

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष  तृतीया तिथि और हस्त नक्षत्र आया उसी दिन भगवान शंकर वहां प्रकट हो गए और पार्वती को पत्नी स्वरूप स्वीकार किया फिर पार्वती को वरदान दिया तुम्हें इस दिन तीज माताके रूप में हर  स्त्री पूजा करेगी जो कोई स्त्री भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को शिवपार्वती का व्रत पूजा और हरतालिका तीज की कथा सुनेगी उसकी सभी मनोकामनाए पूरी होगी  ।

शिव  के इस प्रकार के वचनों को सुनकर पार्वती बहुत प्रसन्न हुई फिर वह भगवान शंकर को प्रणाम करते हुए अपने घर वापस आ गई ।

श्री कृष्ण द्रोपदी से कहते हैं हे द्रोपदी जो भी स्त्री प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत करती है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है इस व्रत को करने से भगवान शंकर और मां पार्वती से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं  ।


हरतालिका तीज व्रत मुहूर्त 2022
 30 अगस्त 2022 मंगलवार
शुभ मुहूर्त 05:10 amसे ०७:40 pm
कुल  अवधी  - ०२ घण्टे ३३ मिनट्स


 2022  हरतालिका तीज व्रत पूजा  विधि | hartalika teej puja,vrat vidhi


इस दिन प्रत्येक महिलाएं अपने पति के लिए और अविवाहित लड़कियां भविष्य में सुंदर वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दुबारा मिलन हुआ था इसीलिए यह व्रत प्रत्येक सुहागिन नारियों नारियों नारियों के लिए विशेष माना जाता है।

इस दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर अपने नित्य कर्म से निवृत्त होकर पूरे घर की सफाई करनी चाहिए और खुद भी सोलह श्रृंगार करके पूरे घर को सजाना  चाहिए।

अपने पूजा स्थल में जाकर दीप गणेश कलश और शिव पार्वती  का पूजन विधि पूर्वक करें। सबसे पहले दीपक जलाएं दीपक की विधि पूर्वक पूजा करें और गणेश का पूजन करें कलश में गंगाजल डालें कलश की भी विधिपूर्वक पूजा करें। फिर अंत में शिव और पार्वती की पूजा करें मां पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पण करें।

इन मंत्रो से आप आप संछिप्त में पूजा कर सकती हैं -


दीपक कलश गणेश शिव पर्वती के लिए विशेष मंत्र

दीपक जलाने का मंत्र-
दीपज्योति: परब्रह्म: दीप ज्योति: जनार्दन:दीपो हरति मे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।।
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।।

कलश पूजा का मंत्र-
कलशस्य मुखे विष्णु: कण्ठे रुद्रळ समाश्रित:मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।
कुक्षौ तु सागरा: सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा,ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेद: सामवेदो ह्यथर्वण:
अंगेश्च सहिता: सर्वे कलशं तु समाश्रिता:,अत्र गायत्री सावित्री शान्ति: पुष्टिकरी तथा।
आयान्तु देवपूजार्थं दुरितक्षयकारका:,गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धुकावेरि जलेऽस्मिन संनिधिं कुरु।सर्वे समुद्रा: सरितीर्थानि जलदा नदा:,
आयान्तु मम शान्त्यर्थं दुरितक्षयकारका:।

गणेश पूजा मंत्र-
 वक्र तुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ:।निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥

शिव पार्वती पूजा मंत्र- 
गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला,सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।।
 ॐत्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

ये सब करने के बाद हरियाली तीज व्रत की कथा सुने या खुद पढ़े। कथा सुनने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं गरीबों को भोजन कराएं जो आर्थिक रूप से असमर्थ हैं उनको अपने सामर्थ्य अनुसार दान करें फिर भगवान शिव और पार्वती को प्रणाम करते हुए व्रत का समापन करें।

2022 हरतालिका तीज व्रत का महत्व | Importance of HartalikaTeej Fast 

hartalika vrat 2021 अपने पति  के लिये करती है पूजा
हमारे हिंदू धर्म में हर एक व्रत का अपना ही अलग महत्व है लेकिन हरतालिका तीज व्रत  का व्रत महिलाएं और अविवाहित लड़कियों के लिए बहुत ही खास हो जाता है।ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शंकर ने मां पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था।

भगवान शंकर ने मां पार्वती को इस दिन सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया था। इसीलिए सभी सुहागिन स्त्रियां इस दिन पुरे श्रद्धा भाव से व्रत रखती हैं।

हरतालिका तीज व्रत के आठ नियम | hartalika teej vrat ke 8 niyam

  1. तीज के दिन अपने घर को विशेष रूप से सजाना और स्वच्छ रखना चाहिए।
  2. हरतालिका तीज व्रत के दिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार करना चाहिए।सोलह श्रृंगार में साड़ी मेहंदी और चूड़ियां विशेष रूप से पहनना चाहिए।
  3. हरतालिका तीज व्रत के दिन शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और पार्वती की पूजा व कथा सुननी चाहिए।
  4. इस दिन प्रत्येक स्त्री को मधुर वचन बोलने चाहिए ऊंची आवाज में किसी से बात नहीं करना चाहिए।
  5. इस दिन जितना हो सके भगवान शिव पार्वती का जप भजन कीर्तन करें।
  6. हरतालिका तीज व्रत के दिन जितना हो सके हरे और लाल रंग का प्रयोग करें क्योंकि यह सौभाग्य का प्रतीक है।
  7. पूजा व्रत संपन्न होने के बाद किसी गरीब को भोजन जरूर कराना चाहिए।
  8. सौभाग्यवती स्त्रियों को सोलह श्रृंगार का दान भी करना चाहिए।

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हरतालिका तीज व्रत  के लिए खास उपाय | remedy of hartalika teej vrat


  •  इस दिन किया गया पूजा व्रत और उपाय भविष्य में महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति कराता है अतः सभी को हरतालिका तीज व्रत  (Hartalika Teej ) के लिए खास उपाय करना चाहिए।

  • 2022 हरतालिका तीज (Hartalika Teej)के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों का दीपक जलाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • इस दिन शिव मंदिर में जाकर विधिपूर्वक पूजा करने से और शनि मंदिर में जाकर शनि की पूजा करने से रोजगार संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा आर्थिक स्थिति मैं सुधार होगी।


  • इस दिन मां पार्वती के सामने सोलह सिंगार करके बैठ जाएं मां पार्वती की आराधना करते हुए उनके ऊपर सोलह  श्रृंगार अर्पण करने से विवाह में आ रही सभी बाधाएं टल जाती हैं और विवाह शीघ्र ही संपन्न हो जाता है।