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yudhishthir ne apni hi maa ko srap diya | युधिष्ठिर ने माँ को श्राप दिया

yudhisthir ne apani mata kunti ko sarp kyu diya |  युधिष्ठिर ने माँ  कुंती को श्राप क्यों दिया ?

महाभारत एक अद्भुत ग्रंथ है महाभारत में ऐसे बहुत सारे रहस्य छुपे हुए हैं जिनका संबंध पूर्ण रुप से आज भी हमारे जीवन से हे ।उन्ही रहस्यों  में से एक है युधिष्ठिर का अपनी माता कुंती को श्राप देना आखिर क्यों दिया yudhishthir ne apni hi maa ko srap ?

yudhishthir ne apni hi maa ko srap diya | युधिष्ठिर ने माँ को श्राप दिया

युधिष्ठिर ने माँ को श्राप क्यों  दिया | yudhishthir ne kyu diya kunti ko srap

हर कोई यही कहता है  की औरतों को कभी भी गुप्त बातें नहीं बतानी चाहिए ! जो समाज के हित में हो,अपनों के हित में हो,क्योंकि ऐसा माना जाता है नारी जात को कोई भी बात पचती नहीं है !वो ज्यादा देर तक कोई  बात को छुपा के नहीं रख सकती,आखिर क्यों ?क्योंकि युधिस्टर ने समस्त नारी जात को यह  श्राप दिया था  कि कोई भी नारी किसी भी बात को ज्यादा देर तक छुपाके  नहीं रख सकती।
 
हम सभी जानते हैं कि  माता कुंती के पाँच पुत्र थे युधिष्ठर भीम अर्जुन नकुल और सहदेव  इनके अलावा माता कुंती का एक और  पुत्र था उस पुत्र का नाम महावीर कर्ण था ।माता कुंती ने समाज के भय के कारण कर्ण को जन्म लेते ही त्याग कर दिया था ताकि समाज में उनकी बदनामी न हो ।

कर्ण  को त्याग देने की कहानी

माता कुंती धर्माचरण में रहने वाली एक कुलीन नारी थी साधु संतों का सत्कार करना आसाहाय को सहायता करना सदा अपने कर्म में तत्पर रहती थी  माता कुंती की ऐसी भक्ति देखकर ऋषि दुर्वासा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने माता कुंती को एक मंत्र दिया

फिर कहां की है कुंती इस मंत्र का जाप करते ही तुम जिस देवताओं को चाहो उसे बुला सकती हो और  संतान प्राप्त कर सकती हो इससे तुम्हारे चरित्र पर कोई दाग नहीं लगेगा। इतना कहकर ऋषि दुर्वासा अपने आश्रम चले गए और माता कुंती भी अपने घर को लौट गई।

 घर में जाकर माता कुंती ने ऋषि दुर्वासा के दिए हुए मंत्र का प्रयोग करना चाहा  माता कुंती ने उस मंत्र का जप करते हुए भगवान सूर्य को स्मरण किया और भगवान सूर्य वहां पर उपस्थित हो गए और कुंती को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम कर्ण था।

माता कुंती बहुत भयभीत हो गई कुंती के मन में अनेक विचार आने लगे  कुंती सोचने लगी मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है  मेरा कोई पति भी नहीं है ,मैं तो एक विन बिंहाई नारी हू समाज क्या कहेगा! लोग क्या कहेंगे ऐसी बहुत सारी बातें  सोचते हुए माता कुंती ने कर्ण का त्याग कर दिया।

 महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन ने महावीर कर्ण का वध कर दिया तो माता कुंती ने अपने जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर से कहा की तुम  कर्ण का भी अंतिम संस्कार करो क्योंकि वह तुम्हारा सबसे बड़ा भाई है।

युधिष्ठिर को माता कुंती की बात सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ युधिष्ठिर ने माता कुंती से कहा माता आपने हमें पहले क्यों नहीं बताया कि कर्ण हमारा सबसे बड़ा भाई है! हे माता आपने यदि पहले बता दिया होता तो आज कर्ण जीवित होता । एक नारी के कारण आज एक भाई ने दूसरे भाई को मार डाला।

हे माता! इसलिये आज मैं आपको और समस्त नारी जातिको यह श्राप देता हूं कि आज के बाद कोई भी नारी किसी भी बात को ज्यादा दिनों तक छुपा के नहीं रख सकेगी।

युधिष्ठिर का दिया हुआ वह  श्राप आज भी कायम है आप लोगों ने देखा होगा कोई भी नारी किसी भी बात को देर तक छुपा के नहीं रख सकती वो किसी ने किसी को बता ही देती है। इसलिए कहा जाता है कि नारी को कोई भी गुप्त बात नही बतानी चाहिये।

 युधिष्ठिर ने अपने ही माता कुंती को श्राप दिया इसके पीछे का एक और कारण है पुरुषों की अपेक्षा नारीयो का हृदय ज़्यादा कोमल होता है इसलिये भी वो किसी बात कों अपने मन मे ज्यादा देर तक छुपा नहीं सकती,जबकि पुरुषों का हृदय कठोर होता है । इसलिए हमारे हिन्दू धर्म मे नारियों को उच्च श्रेणी में रखा गया है उनको माता होने का सौभाग्य प्राप्त है।
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