युधिष्ठिर ने अपने ही माता को श्राप दिया/yudhishthir ne apni hi maa ko srap diya


युधिष्ठिर ने अपने ही माता को श्राप दिया/yudhishthir ne apni hi maa ko srap diya

 हमारे हिंदू धर्म  में ऐसे बहुत सारे रहस्य छुपे हुए हैं उनमें से एक है महाभारत
महाभारत एक अद्भुत ग्रंथ है महाभारत में ऐसे बहुत सारे रहस्य छुपे हुए हैं जिनका संबंध पूर्ण रुप से हमारे जीवन से हे । आज हम जानेंगे कि युधिष्ठिर ने महाभारत में अपने ही माता कुंती को क्यों श्रॉफ दिया था l
yudhir and kunti ,mahabharat,युधिष्ठिर ने अपने ही माता को श्राप दिया     बहुत सारे लोग कहते हैं की औरतों को कभी भी गुप्त बातें नहीं बतानी चाहिए ! जो समाज के हित में हो, अपनों के हित में हो ,क्योंकि ऐसा माना जाता है नारी जात को कोई भी बात पचती नहीं है !वो ज्यादा देर तक किसी गुप्त बात को छुपा के नहीं रख सकती, आखिर क्यों ?क्योंकि युधिस्टर जी ने समस्त नारी जात को यह  श्राप दिया है कि कोई भी नारी किसी भी बात को ज्यादा देर तक छुपाके  नहीं रख सकती। 
     हम सब लोग जानते हैं कि  माता कुंती के पाँच पुत्र थे।युधिष्ठर  भीम अर्जुन नकुल और सहदेव  इनके अलावा माता कुंती का एक और  पुत्र था उस पुत्र का नाम महावीर कर्ण था ।माता कुंती ने समाज के भय के करण को जन्म लेते ही कर्ण को छोड़ दिया था यानी उसका त्याग कर दिया था ।ताकि समाज में उनकी निंदा ना हो ।

कर्ण  को त्याग देने की कहानी

माता कुंती एक धर्माचरण में रहने वाली एक कुलीन नारी थी साधु संतों का सत्कार करना आसाहाय को सहायता करना सदा अपने कर्म में तत्पर रहना। माता कुंती की ऐसी भक्ति देखकर ऋषि दुर्वासा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने माता कुंती को एक मंत्र दिया और कहां की है कुंती इस मंत्र का जाप करते ही तुम जिस देवताओं को चाहो उसे बुला सकती हो और  संतान प्राप्त कर सकती हो इससे तुम्हारे चरित्र पर कोई दाग नहीं लगेगा। इतना कहकर ऋषि दुर्वासा अपने आश्रम चले गए और माता कुंती भी अपने घर को लौट गई।  घर में जाकर माता कुंती ने ऋषि दुर्वासा के दिए हुए मंत्र का प्रयोग करना चाहा ! माता कुंती ने उस मंत्र का जब करते हुए भगवान सूर्य को स्मरण किया और भगवान सूर्य वहां पर उपस्थित हो गए और कुंती को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम कर्ण था। माता कुंती बहुत भयभीत हो गई कुंती के मन में अनेक विचारे आने लगी ! मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है  मेरा कोई पति भी नहीं है ,मैं तो एक विन बिंहाई नारी हू  समाज क्या कहेगा! लोग क्या कहेंगे ऐसी बहुत सारी बातें  सोचते हुए माता कुंती ने कर्ण का त्याग कर दिया। महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन ने महावीर कर्ण का वध कर दिया तो माता कुंती ने अपने जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर से कहा कर्ण का अंतिम संस्कार करो क्योंकि वह तुम्हारा सबसे बड़ा भाई है।
युधिष्ठिर को माता कुंती की बात सुनकर बड़ा आश्चर्य लगा युधिष्ठिर ने माता कुंती से कहा माता आपने हमें पहले क्यों नहीं बताया कि कर्ण हमारा सबसे बड़ा भाई है! हे माता आपने यदि पहले बता दिया होता तो आज कर्ण जीवित होता । एक नारी के कारण आज एक भाई ने दूसरे भाई को मार डाला इसलिए
     हे माता! आज मैं आपको और समस्त नारियों को यह श्राप देता हूं कि कोई भी नारी किसी भी गोपनीय बात को ज्यादा दिनों तक छुपा के नहीं रख सकेगी ।
युधिष्ठिर का दिया हुआ वह  श्राप आज भी कायम है आप लोगों ने देखा होगा कोई भी नारी किसी भी बात को देर तक नहीं रख सकती वो किसी ने किसी को बता ही देती है। इसलिए कहा जाता है कि नारी  को कोई भी गुप्त बात नही बतानी चाहिये।
नोट: युधिष्ठिर जी ने अपने ही माता कुंती को श्राप दिया इसके पीछे का एक और कारण है पुरुषों की अपेक्षा नारीयो का हृदय ज़्यादा कोमल होता है इसलिये भी वो कोई बात कों अपने मन मे ज्यादा देर तक नही रख सकती,जबकि पुरुषों का हृदय कठोर होता है । इसलिए  हमारे हिन्दू धर्म मे नारियों को उच्च श्रेणी में रखा गया है उनको माता होने का गर्व प्राप्त है ।
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