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nanda bhadra jaya rikta purna | कौन-कौन से है शुभ अशुभ तिथिया

 nanda bhadra jaya rikta purna | नंदा भद्रा जया रिक्ता और पूर्णा तिथियों की जानकारी 


nanda bhadra jaya rikta purna,नंदा,भद्रा,जया,रिक्ता,पूर्णा, इन तिथियों को जिसने भी समझ लिया उनको मुहूर्त देखने की कोई जरुरत नहीं है सभी कार्य सफल हो जाते हैं

 हिंदू केलिन्डर  काल गणना का सबसे महवपूर्ण हिस्सा  हैं हर शुभ कार्य हिंदू पंचांग के तिथियों के अनुसार ही  किए जाते हैं। कोई भी कार्य करने से पहले शुभ तिथियां देखी जाती है।

शुभ-अशुभ तिथियां आखिर होती क्या हैं और किस तिथि का क्या महत्व है क्या है ये नंदा भद्रा जया आदि तिथियां चलिये जानने का प्रयास करते है।

 nanda bhadra jaya rikta purna | कौन-कौन से है शुभ अशुभ तिथिया
nanda bhadra jaya rikta purna

प्रत्येक हिंदू महीने के अनुसार पंद्रह पंद्रह दिन के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष होते हैं हरेक पक्ष में प्रतिपदा से लेकर पंद्रहवीं तक दोनों पक्ष को मिलाकर कुल तीस तिथिया होती है।

शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक और कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या । इस प्रकार दोनों पक्षों में पंद्रह पंद्रह दिन आ जाते हैं।

 इनमें से कुछ तिथि को शुभ माना जाता है और कुछ तिथियों को अशुभ माना जाता है। शुभ तिथि का शुभमुहूर्त बनाया जाता है और अशुभ का अशुभ काल बनाया जाता है।

सनातन पंचांग और वैदिक ज्योतिष में तिथियों को मुख्य रूप से पांच भागों में बांटा गया है। ये पांच तिथिया  इस प्रकार  हैं -
  Nanda bhadra jaya rikta purna | नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता  पूर्णा।


नंदा तिथि(nanda tithi) प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी को नंदा तिथि कहा जाता है। इन तिथियों को व्यापार-बिजनेस नया घर निर्माण ,स्कूल निर्माण के लिए बहुत ही शुभ माना गया है ।

भद्रा तिथि(bhadra tithi) द्वितीया, सप्तमी और द्वादशी  भद्रा तिथि कही जाति हैं। इन तिथियों में खरीदारी का काम अधिक होता है।

जैसे- घर मे अनाज लाना, गाय-भैंस खरीदकर लाना नया वाहन घर मे लाना आदि शुभ काम भद्रा तिथि में किये जाते है। ऐसी मान्यता है कि भद्रा तिथि में घर मे नया समान लाने से उस की वृद्धि होती हैं।

जया तिथि(jaya tithi) तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी को जया तिथि बोला जाता हैं।यह तिथि दुसरो पर विजय प्राप्त करने वाली तिथि है।

इन तिथियों में  कोर्ट-कचहरी के मामले निपटाना, हथियार खरीदना, वाहन खरीदना शत्रु पर विजय प्राप्त करना जैसे काम किये जाते हैं।

रिक्ता तिथि(rikta tithi) चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी रिक्ता तिथियां  हैं। रिक्ता तिथि हम जैसे आम आदमी (गृहस्थ ) के लिए नही बना है।

जो  गृहस्थ है उन्हें रिक्ता तिथि में कोई भी मांगलिक काम नहीं करना चाहिये  यह तिथि तांत्रिको के लिए बनाई गई है। कोई भी तंत्रमंत्र सिद्ध करना हो या किसी पर मंत्र प्रयोग करना हो तो यह तिथि शुभ मानी गई है(सिर्फ तांत्रिक)के लिये।

पूर्णा तिथि(purna tithi) पंचमी, दशमी और पूर्णिमा इन तिथियों को पूर्णा तिथी बोला जाता हैं । इन तिथियों में सभी प्रकार के मांगलिक काम किये जाते है जैसे- वाग दान(मंगनी), विवाह, भोज ,रात्रि जागरण ,भंडरा कराना जितने भी शुभ कार्य करना हो पूर्णा तिथि में कर सकते  है।

शून्य तिथि(suniya tithi) तिथियां सिर्फ पांच प्रकार की नही होती है नंदा, भद्रा,जया, रिक्ता और पूर्णा  इन तिथि के अलावा शून्य तिथियां भी होती है हिन्दू पंचांग के अनुसार ये शून्य तिथियां इस प्रकार है-

चैत्र कृष्ण अष्टमी, वैशाख कृष्ण नवमी, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी, ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, आषाढ़ कृष्ण षष्ठी, श्रावण कृष्ण द्वितीया और तृतीया, भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा एवं द्वितीया, आश्विन कृष्ण दशमी और एकादशी, कार्तिक कृष्ण पंचमी एवं शुक्ल चतुर्दशी, अगहन कृष्ण सप्तमी व अष्टमी, पौष कृष्ण चतुर्थी एवं पंचमी, माघ कृष्ण पंचमी और माघ शुक्ल तृतीया इन तिथियों में कोई भी शुभ कार्य भूल से भी न करे

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