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kanakadhara stotra || कनक धारा से होती हैं धन की बारिश

अपार धन पाने के लिये करें कनकधारा स्तोत्र( kanakadhara stotra)का विधि पूर्वक पाठ 

ज्यादातर परेशानी इंसान को धन के कमी के कारण ही होती हैं एसे में कनकधारा स्तोत्र (kanakadhara stotra) आपके बहुत काम आसकता हैं भलेही उनके पास पैसा पर्याप्त मात्रा हो लेकिन धन की कमी हमेशा रहती हैं। इसी कमी को दूर करने के लिये शंकराचार्य ने एक मंत्र(स्तोत्र) का जप किया था जिसके फल स्वरूप धरती पर धन की बारिश हो गई थी उस स्तोत्र हम श्री कनकधारा(kanakadhara istotra ) के नाम से जानते हैं।

kanakadhara stotra ki puri jankari

क्या है कनकधारा स्तोत्र?। kya hai kanakadhara istotra?

यह स्तोत्र अपने आप मे चमत्कारी है ऐसी मान्यता है जिसने जीवन मे कभी अधिक धन नही देखा जिनका जन्म निर्धन परिवार में हुआ जो जीवनभर आर्थिक तंगी से जुझते रहे पैसों के लिये दर दर ठोकरे खाते रहे ऐसे व्यक्ति अगर कनकधारा का जप (kanakdhara ka jap) या पाठ रोज एक बार करे तो उनकी धन संबंधी परेशानी कुछ ही महीनों में समाप्त हो जाएगी।


ऐसे हुई थी कनकधारा स्तोत्र की उत्पत्ति । kanak dhara katora ki utpatti


पुराणों में ऐसी मान्यता है कि आदि शंकराचार्य खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे वह घर-घर जाकर लोगों से भिक्षा मांग रहे थे लेकिन उनको भिक्षा नहीं मिल रही थी। घूमते घूमते शंकराचार्य एक निर्धन ब्राह्मण के घर भिक्षा मांगने पहुंच गए लेकिन दुर्भाग्यवश उस ब्राह्मण के पास भिक्षा देने के लिए कुछ नहीं था। 

फिर भी उस ब्राह्मण ने शंकराचार्य को एक आंवला भिक्षा के रूप में दे दिया उस ब्राम्हण की निर्धनता को देखकर शंकराचार्य को उस  पर बहुत दया आई। उसकी निर्धनता को दूर करने के लिए शंकराचार्य ने माता लक्ष्मी को स्मरण करते हुए कुछ मंत्र पढ़े फल स्वरुप उसके आंगन में सोने के आंवले आकाश से गिरने लगे।

आदिशंकराचार्य द्वारा पड़े गए उसी मंत्रों को आज हम कनकधारा स्तोत्र(kanakadhara istotram) के नाम से जानते हैं।


कैसे करे कनक धारा स्तोत्र का जप ।kaise kare kanak dhara katora ka jap

कनकधारा स्तोत्र के जप या पाठ से माता लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है क्योंकि ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सांसारिक सुखों का कारक ग्रह माना गया है  शुक्र ग्रह के खराब होने से भी जीवन में निर्धनता आती है अतः शुक्रवार के दिन ही कनकधारा स्तोत्र का विधिवत पाठ करें 


सबसे पहले कनकधारा यंत्र की स्थापना अपने घर के मंदिर में शुक्रवार के दिन करें उस यंत्र को गंगा जल से अच्छी तरह धोकर पवत्र कर मंदिर में स्थापित करे फिर सफेद कपड़े धारण करे धी का दीपक जलाये यंत्र को धूप दिखाये 

उसके बाद kanakadhara stotra स्तोत्र का  शुध्द पाठ करें आप स्वयं अनुभव करेंगे कुछ ही  दिनों में धन से संबंधित परेशानियां दूर हो रही है माता लक्ष्मी की कृपा आप पर हो रही हे बस आपको विश्वास होना चाहिए।

धन की चाहना रखने वालों के लिए हमारे हिंदू धर्म में बहुत सारे उपाय बताए गए हैं दुर्भाग्य यह है कि उन उपायों को कोई करना ही नहीं चाहता ।

गरीव व्यक्ति भी बनजाता हैं करोडपति कनकधारा स्तोत्र(kanakadhara istotra)के पाठ से जिसने अपने जीवन  में  कभी ज्यादा पैसे नहीं देखे  वो भी पैसे वाला बन जाता हैं  कनकधारा (kanakdhara)का नित्य पाठ  वो भी  पूरी विधिसे करने पर माता लक्ष्मी  की कृपा अपार होगी  

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||श्री कनकधारा स्तोत्रम्|| Shree kanakadhara istotram||

अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।

अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।

मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।

माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।

ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।

आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।

बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरि‍नीलमयी विभाति।

कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।5।।

कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।

मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।6।।

प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।

मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।7।।

दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।

दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।8।।

इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।

दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।9।।

गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।

सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै ‍नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।10।।

श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।

शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।11।।

नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।

नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।12।।

सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।

त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।13।।

यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।

संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।14।।

सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।

भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।15।।

दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।

प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।16।।

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।

अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।17।।

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।

गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया:।।18।।

।।इति श्री कनकधारा स्तोत्रं सम्पूर्णम।।

आप निचे दिये गये ऑडियो को सुनकर कनकधारा का सही और शुद्ध पाठ सिख सकते हैं 

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