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ब्रेन सर्जरी के दौरान महिलाने गाया हनुमान चालीसा | hanumaan chalisa ka chamatkar

 ब्रेन सर्जरी के दौरान महिलाने गाया हनुमान चालीसा | hanumaan chalisa ka chamatkar


hanumaan chalisa ka chamatkar | हनुमान चालीसा का चमत्कार

आपने जीवन मे चमत्कार नाम का शब्द तो बहुत बार सुना होगा लेकिन आजतक चमत्कार होते हुये कभी नही देखा होगा वो भी बड़े बड़े डॉटकारों के सामने जी हाँ आपने बिल्कुल सही सुना ।


दरअसल एक महिला अपने ब्रेन की सर्जरी कराने के लिये अस्पताल गई डॉक्टर उस महिला की ब्रेन सर्जरी कर रहे थे महिला ने आपरेशन के दौरान ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू करदिया महिला को हनुमान चालीसा का पाठ करते देख सभी डॉटकरो के होश उड़गये।


यह घटना और कहीं नहीं  दिल्ली के aiims अस्पताल में हुआ था यह आपरेशन दिखने में तो सामान्य लग रहा था ।

लेकिन यह कोई चमरकर से कम नही था हनुमान जी के प्रति इतना विस्वास शायद ही किसीने पहले देखी होगी।


हम zee news के पूरी टीम को धन्यवाद देते है जिन्होंने इस खबर को दिखाया । आप सभी को यह वीडियो जरूर देखना चाहिये।


आजकल ज्यादा यही सुनने में आता है भगवान नही है अगर होते तो दिखाई देते । भगवान पहले भी थे और आज भी है इसमें कोई संसय नही होना चाहिये इंसान इतना स्वार्थी हो चुका की उसे अपने फायदे के अलावा और कुछ दिखाई ही नही देता । 


इंसान को हर विषय मे प्रूफ चाहिये बिना सबूत के कुछ मानने को तैयार नही लेकिन वो ये भूल गया भगवान को सबूत नही विस्वास से पाया जा सकता है साधना से भगवान के होने का अनुभव किया जा सकता है।


जिस व्यक्ति में कभी गुण खाया ही नही वो कैसे बता सकता है कि गुण मीठा है या तीता! वो तो यही कहेगा न गुण इतना काला है तो स्वाद भी कड़वा ही होगा।


परमात्मा को जानने के लिये पहले तो शरीर पवित्र होना चाहियें, मन पवित्र होना चाहिये  फिर धीरे धीरे अपने ईस्ट देव के मंत्रों को सिद्ध करना चाहिये जैसे- उस महिला ने हनुमान चालीसा को किया । उसे अपने इष्ट देव के प्रति इतना विस्वास था कि होश में रहते हुये अपने ब्रेन की सर्जरी करवाई।


भगवान खुद ही कहते है मैं तो आनेके लिये कब से तैयार बैठा हूँ मुझे कोई प्यार से बुलाता ही नहीं। सूरदास अंधे थे भगवान का भजन पूरी श्रद्धा और विस्वास से गाते थे जिसका फलस्वरूप उनको भगवान के दर्शन होगये। आजकल भी बहुत लोग भगवान का भजन गाते है फिर भी उनको दर्शन नही होते क्यों?


क्यों कि उनमें सूरदास जैसी भक्ति नही है आजकल के कलाकारों के गानों से स्वर्थ की बू आती है। ऐसे बहुत सारे उदाहरण है जो हम आपको दे सकते है मीरा ने नाचते हुये भगवान को खुश कर दिया "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो "  लोग आज भी बहुत अच्छा नाचते है  पर मीरा जैसा कोई नाच ही नही सकता, भक्त प्रह्लाद ने खम्बे से भगवान को निकाल दिया , शबरी ने जूठे बेर राम को खिलाया भगवान राम खुश होगये । 


हमारे पास दूसरों को देनेके लिये बहुत समय है लेकिन भगवान के लिए एक मिनट भी समय नही है। 


"भजन करन को आलसी भोजन को होशियार"जहा भजन पूजन की बात आती है वहाँ हम आलसी हो जाते है।

वही भोजन यानी स्वाद भरा खाना खाने की बात करें,पार्टी की पिकनिक की बात करे तो बिल्कुल देर नही करते सब कामों को छोड़कर खाने पहले पहुच जाता है। इसीलिये आज का इंसान दुखी है भगवान को भूल गया है जब उसे ज्यादा तकलीफ होती है अंत मे भगवान को ही कोसता है भगवान  मुझे ही दुख क्यों देता है।

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