अंक का प्रमाण ?Number analysing os sastra

वैदिक शास्त्र में अंक का प्रमाण


हमारे वैदिक शास्त्र में बहुत सरी ऐसी बाते है जो हमे नही पता है
आज के इस लेख में हम बात करेंगे वैदिक शास्त्र में अंक यानि (number) क्या अर्थ होता है।

अंक का प्रमाण

शून्य-   आकाश
अंक का प्रमाण ?Number analysing os sastra

एक-    ईश्वर

दुइ-     प्रकृति-पुरुष,माया-ब्रम्हा, जीवात्मा-परमात्मा

त्रिमधु- घृत,मधु,शर्करा

त्रिताप- आध्यात्मिक, आधिदैविक,आधिभौतिक

त्रिकालसंध्या- प्रातगयात्री,मध्यान्हगायत्री,सायम्गायत्री

त्रिगुण- सत्व, रज, तम

त्रिभुवन-स्वर्ग, मर्त्य,पाताल

चतुरपुरुसार्थ- धर्म , अर्थ,काम, मोक्ष

चार वर्ण-ब्राम्हण,क्षत्रीय,वैश्य,शूद्र

चार्युग-सत्य,त्रेता,दुआपर,कली

चारवेद-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद,अथर्वेद

चारनीति- साम,दाम,दण्ड, भेद

चारधाम- जगन्नाथ, दुवारिका,बद्रीनाथ, रामेस्वर

चारदिशा-पूरब,पश्चिम, उत्तर,दक्षिण

पंचामृत-गौ दूध,गोदधि, गोघृत,मधु, चीनी

पांच पत्ते- बट, पीपल,आम्र,डूमरी,पाखी

पंचकन्या-अहिल्या,द्रोपदी,सीता,तारा,मंदोदरी

पंच देव-गणेश,सूर्य,दुर्गा,विष्णु शिव

पंचांग- तिथि,बार,नक्षत्र,योग,करण

पंचोपचार पूजा- धूप,दीप, नैवेद्य ,आरती,पुष्पांजलि

षड् शास्त्र- सांख्य,योग,वेदांत,मीमांसा,न्याय,वैशेषिक

षड् वेदांग-शिक्षा, कल्प ,व्याकरण,निरुक्त,ज्योतिष,छन्द,

षट्कर्म,मारण,मोहन,वशीकरण, उच्चाटन,स्तम्भन,उत्कीलन

षट् ऋतु-शिशिर, वसन्त,ग्रीष्म, वर्षा, शरद,हेमंत

सप्तपुरी- अयोध्या, मथुरा,माया,माया,काशी,कांची, अवंतिका,दुरावती

अष्टगन्ध-श्रीखंड,अगरू, कपूर,कस्तूरी,गोरोचन,कुंकुम, हस्तिमद,लाक्षरस

अष्टचिरंजिव-मार्कण्डेय,अस्वाथामा,बलि, ब्यास,हनुमान,विभीषण,कृपाचार्य, परसुराम

अष्टदिशा-पूर्व, आग्नेय,दक्षिण,नैऋत्य,पश्चिम,वायव्य,उत्तर,ईशान

नवधा भक्ति-कीर्तन,अर्चन,वंदन,पादसेवन, स्मारण,आत्म निवेदन,दासत्व,सख्य

नव रस-सृंगार, वीर,करुणा,अद्भुद, हास्य,भयानक,बीभत्स,रौद्र, शांत

नौ ग्रह- सूर्य,चंद्र,मंगल, बुध,गुरु,शुक्र,शनि,राहु,केतु

नवदुर्गा-शैलीपुत्री,ब्रम्हचारिणी, चंद्रघंटा,कुष्मांड, स्कंध,कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी,सिद्धिदात्री,

दश दिक्पाल-इंद्र,अग्नि,   यम,निऋति,वरुण,वायु,कुबेर,ईशान,ब्रम्ह, अनंत

षोडशसंस्कार-गर्भाधान,पुंसवन,सिमन्तोनयन,जातकर्म, नामकरण,निष्क्रमण, अन्नप्राशन,चूड़ाकर्म,कर्णवेध,उपनयन,वेदारंभ,केशांत,समावर्तन,विवाह,अंत्यकर्म,श्राद्ध,

सर्वोषधी- कूट ,हल्दी,जटामासी,चुतरो,मुरा, श्रीखंड,शालाजीत,बोझों, चाँप, मोथे।

दोस्तो इस लेख में मैंने जो मुख्य-मुख्य,बात है उसी पर ही प्रकाश डाला है,अगर आपलोगो को इस विषय मेअधिक जानकारी चाहिए तो कृपया कमेंट करे।
                   
                 धन्यबाद...