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brihaspativar ka vrat katha | कैसे करे गुरुवार का व्रत

Rules of brihaspativar vrat katha | कैसे करे गुरुवार का व्रत की पूरी जानकारी 

बृहस्पतिवार का व्रत कथा(brihaspativar vrat katha)किस को रखना चाहिए कब रखना चाहिए किन किन परिस्थितियों में गुरुवार का व्रत(Guruwar vrat)रखा जाता है बृहस्पतिवार का व्रत किस प्रकार रखा जाता है उसके नियम क्या है?(Rules of brihaspativar vrat) हमें कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए

Rules of brihaspativar vrat katha | कैसे करे गुरुवार का व्रत

About brihaspativar vrat katha 


जब भी आप व्रत रखने का सोचें तो किसी भी शुक्ल पक्ष की पहली बृहस्पतिवार को यह व्रत प्रारंभ करना चाहिए बृहस्पतिवार के सुबह नहा धोकर पीले वस्त्र धारण करें मन में व्रत की कामना को स्मरण करते हुए बृहस्पतिवार का व्रत शुरू करें ।

नहा धोने के बाद एक लोटा ले ले उस लोटे में जल भरकर उसमें एक चम्मच पीला हल्दी डाल दें फिर उस जल से भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। उसके पश्चात केले के वृक्ष के नीचे जाकर उसमें भी बृहस्पति के मंत्रों का जाप करते हुए जल चढ़ाएं बृहस्पति भगवान के कुछ सरल मंत्र नीचे दिए गए हैं।

  बृहस्पति वैदिक मंत्र

ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।

यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

 बृहस्पति तांत्रिक मंत्र

 ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः।

फिर उसके बाद बृहस्पतिवार व्रत कथा की पुस्तक को आप पढ़ भी सकते हैं किसी से पढ़ा कर आप सुन भी सकते हैं यह पुस्तक बाजार में आपको आसानी से मिल जाएगी। दिन में अन्न का सेवन ना करें केवल फल और जल ही आप ग्रहण कर सकते हैं।

ध्यान रहे वृस्पतिवार के दिन आपको सिर्फ पीला ही अन्न खाना चाहिए बेसन का हलवा बेसन का लड्डू बिना नमक का। जब सूर्य अस्त हो आपको पुनः बृहस्पति के मंत्रों का जितना हो सके अपने सामर्थ्य अनुसार जप करना चाहिए।

Benifits of brihaspativar vrat katha | बृहस्पतिवार व्रत का लाभ 

 किसी को सुख चाहिए किसी को अधिक धन चाहिए तो किसी को सुंदर हमसफर चाहिए ऐसे में बृहस्पतिवार का व्रत आपके लिए बहुत फायदा पहुंचा सकता है । आपको बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु का  पूजन करना चाहिए साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ पूरे भाव से करना चाहिए।

कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा 
भगवान विष्णु की एक सुंदर प्रतिमा होना चाहिए  प्रतिमा उपलब्ध ना हो तो एक सुंदर सा तस्वीर होना आवश्यक है सबसे पहले आचमन करके शुद्ध आसन में बैठकर षठकर्म करें षठकर्म कर्म क्या है इसको जानने के लिए आप यह पोस्ट पढ़ सकते हैं। फिर दीपक जलाएं भगवान गणेश का पूजन करें कलश का पूजन करें उसके बाद भगवान विष्णु की षोडशोपचार या पंचोपचार से पूजा करें।

भगवान विष्णु को केला और पीला धोती चढ़ाएं बेसन के लड्डू चढ़ाएं जितना ज्यादा हो उतना पीला पुष्प चढ़ाएं पीले पुष्पों की माला पहनाए उसके पश्चात विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम का पाठ करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने में आपको कठिनाई हो रही हो तो आप श्रीमद्भगवद्गीता के 11 वीं अध्याय का पाठ कर सकते हैं।

अगर यह दोनों पाठ करने में आपको कठिनाई होती है तो आप एक माला जप ॐ विष्णवे नमः का कर सकते हैं ध्यान रहे जप करने वाली माला हल्दी से बनी हुई होनी चाहिए तभी आपका व्रत पूर्ण रूप से सफल हो पाएगा । बृहस्पतिवार के दिन जब आपका व्रत पूर्ण हो तो अंत में हाथ जोड़कर सर झुका के अपने व्रत की कामना (जिस उद्देश्य से व्रत लिया हो) करते हुए भगवान को प्रणाम करें फिर व्रत का समापन करें।

बहुत बार ऐसा होता है सब कुछ ठीक होते हुए भी कुछ अच्छा नहीं होता है ऐसी स्थिति में यह मानकर चलना चाहिए कि कुंडली में कहीं न कहीं बृहस्पति ग्रह खराब है या किसी बुरे ग्रह से पीड़ित है तभी ऐसी समस्याएं आती हैं।

इस प्रकार की समस्या को खत्म करने के लिए आपको बृहस्पति वार का व्रत (brihaspativar vrat) तो करना ही चाहिए साथ ही हर बृहस्पतिवार को मंदिर में जाकर गरीब दुखियों की  सेवा करनी चाहिए अपनी शक्ति अनुसार दान देना चाहिए विशेष रुप से पीली वस्तुओं का दान जैसे केला , बेसन की लड्डू पका हुआ आम हलवा इन सब चीजों का दान देना चाहिए ध्यान दें जिस दिन आप जो भी सामग्री दान में दे उस दिन आपको उन सामग्रियों का सेवन बिलकुल भी नहीं करना है।

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