क्या आप जानते हैं एकादशी का व्रत कब से शुरू हुआ | Ekadashi vrat kab se shuru huwa - Our bhakti- ज्योतिष,राशिफल,व्रतकथा,हिन्दु धर्म,

Latest

Our bhakti- ज्योतिष,राशिफल,व्रतकथा,हिन्दु धर्म,

ourbhakti.com - पर आपका स्वागत हैं यहाँ से आप हिन्दू धर्मं से सम्बंधित जानकारी जैसे ज्योतिष विज्ञान ,पूजा पाठ ,ग्रह शांति , हवन ,व्रत कथा ,वास्तु ,राशिफल, साथ ही सनातन धर्मं की रोचक जानकारी पा सकते हैं ।

क्या आप जानते हैं एकादशी का व्रत कब से शुरू हुआ | Ekadashi vrat kab se shuru huwa

 Ekadashi ka vrat kab se shuru huwa | ekadasi utpati kaise hui | एकादशी की उत्पत्ति कथा कब और कैसे हुई 

एकादशी का व्रत सभी व्रतों में उत्तम माना गया हैं इसलिये सभी हिन्दू धर्मं अवलंबी बहुत ही श्रद्धा पूर्वक एकादशी का व्रत करते हैं लेकिन बहुत लोगो को पता नहीं हैं इस व्रत के पीछे का रहस्य क्या आप जानते हैं एकादशी व्रत की परंपरा कब से शुरू हुई ?ekadashi vrat kab se shuru huwa इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या हैं कैसे हुई एकादशी की उत्त्पत्ति 

Ekadashi vrat kab se shuru huwa

Ekadashi ka vrat kab se shuru huwa | एकादशी का व्रत कब से शुरू हुआ 


सतयुग में शंखासुर का पुत्र मुर नामक दैत्य हुआ शंखासुर को भगवान ने मार डाला इससे मुर को बड़ा दुःख हुआ और इसका बदला लेने के लिये वन में जाकर उसने घोर तप किया।

उसके तप से सन्तुष्ट होकर श्रीब्रह्माजी ने उसके पास आकर उससे वर माँगने को कहा ।

मुर बोला - हे नाथ ! देवता , दैत्य , मुनि - मनुष्य , शिव - विष्णु और लोकपाल - दिग्पाल आदि जहाँ तक आपकी सृष्टि है , मुझसे कोई जीत न सके एसा वरदान दीजिये ब्रह्माजी ने ऐसा ही हो कहकर  अपने धाम को चले गये ।

मुर ने वर पाकर सभी लोकपालों को जीतकर पूरी दुनिया पर अधिकार कर लिया और वहाँ अपने दैत्य को नियुक्त कर दिया मुर के आतंक से  दुःखी होकर देवता भगवान शिव के पास गये । शिव सभी देवता को लेकर भगवान विष्णु की शरण में गये ।

देवताओंने भगवान् विष्णु की  स्तुति की तब भगवान ने प्रसन्न होकर देवताओं को आश्वासन दिया और स्वयं देवताओं और पार्षदों की सेना सजाकर मुर दैत्य से  युद्ध करने निकल पड़े ।

 मुर दैत्य ने भी अपनी सेना सजाकर युद्ध का डङ्का बजवा दिया दोनों में घोर युद्ध हुआ  देवताओं और दैत्यों को प्रबल देखकर भगवान विष्णु ने युद्ध रोकने की इच्छा से मुर पर  सुदर्शन चक्र का प्रहार किया परन्तु वरदान के कारण उस राक्षस ने आह तक नहीं किया

 देवताओं में हा - हाकार मच गया तब भगवान ने दूसरी लीला रची भगवन युद्ध छोड़कर भाग गये मुर दैत्य ने पीछा किया । भगवान भागकर बदरिकाश्रम की एक गुफा में जाकर छिप गये भगवनविष्णु बहुत थके हुये थे जसके कारण वे घोर निद्रा में शो गये ।

मुर ने भी गुफा में प्रवेश किया उसी समय भगवान के हृदय से एक कन्या प्रगट हुई और उस कन्या ने कुछ ही क्षण में सेना सहित मुर दैत्य अंत कर दिया । 

देवताओं ने स्तुति की और पुष्पों की वर्षा की भगवान विष्णु भी निद्रा से जग गये  देवताओं ने भगवान की स्तुति की , फूल बरसाये । भगवान ने उस कन्या से कहा - देवि ! तुम चलकर मेरे लोक में रहो ।

तुम मेरे शरीर से एकादशी तिथि में उत्पन्न हुई हो अतः तुम्हारा नाम एकादशी होगा  तुम अष्ट सिद्धियों , नवो निधियों और सभी प्रकार की गुणों से युक्त हो,तुम दोष रहित हो जो भक्त एकादशी के दिन तुम्हारा व्रत पूरी निष्ठा के साथ  नियम पूर्वक करेंगे उनकी समस्त मनोकामनायें सिद्ध होंगी।

Ekadashi ka vrat kitne din kare , एकादशी का व्रत कितने दिन करे

एकादशी व्रत तीन दिनों में पूर्ण होने वाला बतलाया गया है । दशमी से व्रत का कार्य और नियम शुरू होता है और द्वादशी को पूर्ण होता है । 

इन तीन दिनों में दशमी में दश , एकादशी में ग्यारह और द्वादशी में बारह नियम बताये गये हैं। इसका प्रमाण हमें निम्न श्लोक से मिलता है।

 कांस्यं मांसं मसूरान्नं चणकान् कोद्रवाँस्तथा शापरान्नं च पुनर्भोजनमैथुने । दशम्यां दश वस्तूनि वर्जयेद्वैष्णवः सदा ।। 

अर्थ - काँस का वर्तन , मांस शराब , मसूर , चना , कोदो , शाक , मधु , दूसरे का अन्न, दो बार खाना और मैथुन  ये दश काम दशमी के दिन नहीं करना चाहिये ।

 द्यूत क्रीडां च निन्दां च ताम्बूलं दन्तधावनम् । परापवादं पैशुन्यं स्तेयं हिंसां तथा रतिम् ।। कोचं ह्यनृतवाक्यं च एकादश्यां विवर्जयेत्।। 

अर्थ - जूआ खेलना , नींद लेना , पान खाना , दाँतुन करना , चोरी करना , मैथुन करना , क्रोध करना और झूठ बोलना - एकादशी को ये ग्यारह कार्य न करे ।।

सम्बंधित पोस्ट 

एकादशी तिथी में भूल से भी न करे ये गलतीया 

हम आशा करते हैं आपो  एकदशी की ये ज्ञान वर्धक बातें जानकार अच्छा लगा अगर आपको  हिन्दू धर्मं,कर्मकांड ज्योतिष,वास्तु  से सम्बंधित कोई भी प्रश्न पूछना हो तो कृपया हमें मेल करे धन्यबाद।

Tag-Ekadashi vrat kab se shuru huwa,ekadashi kitne din ki hoti hain,ekadashi kab se shuru huwa,how to ekadashi vrat in hindi,vrat katha,ekadashi vrat vidhi,

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

इस लेख से सम्बंधित अपने विचार कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं