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devta aur rakshas me kaun mahan | देवता राक्षस में कौन महान

 devta aur rakshas me kaun bada hain | देवता और राक्षस में कौन महान ?

देवता और राक्षस  में अक्सर लड़ाई होते रहता है पहले देवता राछस से हारके भाग जाते है फिर कुछ दिमाग लगाते है ईधर उधर जाकर अपनी हार बताते है फिर देवता पुनः राक्षस को मारकर भगा देते है। चाहे जो भी हो जीत आखिर मे देवताओं की ही होती है। ऐसा एक बार नही बल्कि कई बार हो चूका आपने कई कथाये  सुनी होगी चाहे वो भागवत कथा हो या शिव महापुराण या कोई और।
devta aur rakshas me kaun mahan | देवता और राक्षस में कौन महान

devta aur rakshas me kaun mahan 

इस बात से  दानवो को बहुत दुख हुआ की जब भी हम देवता को हराते है तो भगवान देवताओ का ही साथ देते है कही ब्रम्हा जी हमसे कोई छल तो नही कर रहे है! कहीं उनका दिया हुआ वरदान झूठा तो नही!

इस समस्या का हल जानने की लिये  राक्षसों ने ब्रह्माजी से शिकायत की हम लोग देवताओं से कम नहीं  हैं फिर भी अंत में हम राक्षस देवतावो से हार ही जाते हैं । जीता हुवा बाजी हार जाते हैं क्या बात है ?

dev aur danav me kaun bada hain?,देव और दानव में कौन बड़ा ?


 फिर ब्रह्माजी ने मुस्कुराकर कहा - आपके इस समस्या का समाधान में कल करदूँगा दूसरे दिन ब्रह्माजी ने राक्षस और देवताओं को लड्डू खाने के लिए आमंत्रित किया बड़े-बड़े लड्डू बने थे ।

 राक्षस अपने को देवताओं से होशियार मानते थे। इसलिए उन्हें भोजन के लिए पहले बैठाया गया ।

जब लड्डू खाने को दिये गये तो ब्रह्माजी ने राक्षसो के दोनों हाथों में एक - एक सीधी लकड़ी बाध दिया जिसके कारण उनका हाथ  मुड़कर मुँह के पास न आ सके और लड्डू खाने को कहा ।

राक्षस बड़ी मुसीबत में पड़ गये  वे बर्तन में रखी लड्डू उठाते मुँह में तो जाना नही था क्योंकि उनके दोनों हाथ सीधे जो थे ,लड्डू को ऊपर  उछालते  अपना मुँह फैलाकर ऊपर देखते ।

कोई लड्डू तो निशाने से मुँह में पड़ता , कोई नाक पर गिरता , कोई गाल में  गिरता , कोई होठो पर गिरता,कोई आँख में लगती दानव एक भी लड्डू नही खा सके उलटा सारा सामान  बरबाद हो गया सारे राक्षस भूखे रह गए  पेट किसी का नहीं भरा ।

अब बारी थी देवताओ की ब्रह्माजी ने देवताओं को भोजन कराने के लिए बैठाया  ब्रम्हा जी ने ठीक वैसा ही किया जैसा दानवो के साथ किया था ।

देवताओ के भी हाथ बांध दिये गए फिर देवताओं ने विवेक से काम लिया  वे एक लड्डू उठाते और दूसरे के मुँह में डाल देते । इस प्रकार परस्पर के सहयोग से देवताओं ने बड़े आनन्दपूर्वक लड्डू का सेवन किया

और सामान थोड़ा भी इधर-उधर नही गिरा ये  देखकर सारे राक्षस आचार्यचकित रह गये । फिर ब्रह्माजी ने दैत्यों को समझाया  तुम लोगों ने अपनी बुद्धि का सदुपयोग कभी नही किया।

हमेशा अपने को दूसरों से बलवान समझा,  कमजोरो को कष्ट दिया ,लूट मार किया ,तुम लोगो के बुद्धि में स्वार्थ भरा हुआ है ,तुम लोगो ने हमेशा अपनी बुद्धि का प्रयोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिये किया ।

जो अपनी शक्ति का  गलत उपयोग करता है उसे अंत मे हार का सामना जरूर करना पड़ता है। इसलिये तुम लोग देवताओ से अंत मे हार जाते हो ।

ब्रम्हा जी की बातों को सुनकर सभी राक्षस चुप होगये अपना सर नीचे करते हुए वहा  से चले गये।

इस बात से यह तो सिद्ध होगया की किसी को भी सिर्फ अपने मतलब के लिए काम नही करना चाहिये कभी कभी दुसरो का भला करना भी हितकर होता है।

हम आशा करते है  यह लेख पड़कर आपमे थोड़ा बदलाव तो आया होगा अपने लिए तो सभी जीते है इंसान ही नही जानवर भी अपनी व्यवस्था बहुत अच्छी तरीके से करता है।

हमारा देश इस वक़्त कोरोना वायरस के कारण बहुत ही नाजुक स्थिति से गुजर रहा है कोई नही जानता इस बीमारी से छुटकारा कब मिलेगा!

लोग मर रहे है बीमारी से तड़प रहे है जितना हो सके दुसरो की मदद करे गरीबो को खाना दे जरूरतमंदो की सेवा करे खुद भी बचे दुसरो को भी बचाये ।  ourbhakti.com आप सभी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता है ।
                                       ।।धन्यवाद।।
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