about holi festival 2020 | होली सिर्फ रंगों का पर्व नहीं है

 About holi festival | अबाउट होली फेस्टिवल 


रंगों का त्योहार भारत  देश में ही नहीं  अपितु  पूरी  दुनिया  में भव्य रूप से मनाया जाता है जहां आप  होली उत्सव के लिए बहुत  सारी तैयारिया करते हैं सभी प्रकार  के दुखो  को भूलकर होली मनाते  है

होली से सम्बंधित ज्ञान वर्धक बातें (About holi festival) जानकर आपको भी हिन्दू होने पे गर्व होगा हम सभी जानते हैं होलिका (holika) को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन जलाया जाता है होली आने से  एक महीना पहले ही गूलर वृक्ष की एक टहनी को गांव के बाहर गाड़ दिया जाता है।

उस टहनी के चारों तरफ लकड़ी, सूखे पत्ते व खरपतवार आदि से चारों ओर एकत्र किया जाता  है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात को उसे जलाया जाता है इसके पीछे भक्त प्रहलाद का अपने प्रभु के प्रति अटूट विश्वास और अपनी क्रूर बुआ होलिका को स्मरण किया जाता है।
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about holika festival | होलिका को जलाने के पीछे धार्मिक विश्वास 

about holi festival | होली सिर्फ रंगों का पर्व नहीं है
about holi festival

about holi festival 2020
बहुत सारे लोगों  या समुदायों में ऐसी परंपरा है की होली में खेतो के नये  बालियों को भूनकर खाने की भी परंपरा है।  ऐसा विश्वास होता है कि आगामी फसल किस प्रकार होगी या कैसी होगी।

 इसका अंदाजा होली की सिखाएं किस तरह उड़ रही है या  किस और उड़ रही हैं और भुने हुए  दानों के रंग व स्वाद कैसे हैं।

 होली के राख में कुछ औषधि के गुण भी पाए जाते हैं ऐसा लोगों का विश्वास है । कुछ लोग होली में जलाए हुए आग़ के कोइला को  घर में ले जाते हैं और वर्ष भर उस आग़ से  चूल्हा जलाते हैं।

हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार होली (holi) का त्यौहार हिरण्यकशिपु की बहन होलिका (holika) के मर जाने की ख़ुशी में मनाया जाता है।

Holika dahan katha | होलिका दहन कथा 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कथा इस प्रकार है हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रहलाद  को मारने का बहुत प्रयास किया किंतु वह हर बार असफल रहा अंत में उसकी बहन होलिका को अपनी गोद में बैठा कर आग में जलाने  को कहा होलिका को यह वरदान था।

  कि उसे आग नहीं जला पायेगा  इस अहंकार के चलते होलिका ने भक्त प्रह्लाद को जलाकर मारने के लिए आग में बैठ गई। भक्त प्रल्हाद तो मरे नहीं किंतु होलीका (holika) मर गई।

होलिका का अंत इसीलिए  हुआ क्योंकि उसको यह वरदान था की अग्नि सिर्फ उसे नहीं जला सकती। अगर वह किसी और को लेकर बैठ गई तो उसका वह वरदान  कुछ काम का नहीं रहेगा। also readहनुमान को क्यों इतना प्रिय है सिंदूर ?

Holika dahan vidhi | होलिका दहन  विधि 


होलिका दहन इसका मतलब यह नहीं कि लकड़ियों के ढेर को आग लगा दिया जाए आग लगाने के पीछे भी कुछ नियम है। हमें उस नियम को स्वीकार करते हुए होलिका का उत्सव मनाना चाहिए।हम यहां पर बताने वाले हैं की होलिका दहन करने की विधि क्या है?

होलिका दहन करते समय सभी लोग  लोटे में जल भरकर साथ में गंध, चंदन ,चावल, फूल, कच्चा धागा, गुड, हल्दी, नारियल, अबीर गुलाल आदि सामग्री से पूजा करना चाहिए

 सूर्य के अस्त होने के बाद सायं काल में जहां होलिका का दहन होगा उसी स्थान में जाकर दीया जलाकर भगवान् गणेश का पूजा करके फिर जल उस लकड़ी के ढेर के ऊपर चढ़ाया  जाता है और चारों और कच्चा धागा 3 या 7 बार या 11 बार लपेटा जाता है सभी लोग उस लकड़ी के ढेर की परिक्रमा करते हैं और अंत में उसमें फिर से जल का छिड़काव होता है।

पूजन की सामग्री उस लकड़ी के ढेर के ऊपर चढ़ा दी जाति है और पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन होता है फिर होलिका को जला दिया जाता है।

About phalena ki holi | फालेन की होली विश्वप्रसिद्ध है


about phalena ki holi | फालेन की होली विश्वप्रसिद्ध है

about phalena ki holi


उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक फालेन की होली  भी मनाई जाती है यह होली बहुत ही अनोखी होली है फालेन की होली अपितु  भारत में ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

यहां फालेन की होली इसीलिए प्रसिद्ध है की  होलिका  दहन के समय एक पुरोहित जिसको पंडा कहा जाता है वह पंडा नंगे पांव जलती हुई आग के बीच से निकलता हुआ 1 कुंड में कूद जाता  है

सबसे हैरान करने वाला विषय यह है कि उस पंडा को अग्नि नहीं जला पाती यह क्रिया उस प्रह्लाद के भक्ति का एक प्रतीक माना जाता है जो आग में कूद कर बाहर आ जाता है इस कार्य को  देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं। also read शनि का तेल से क्या सम्बन्ध है ?

होली का उत्सव आपस में प्यार बाट्नेवाला उत्सव है 


होली के पर्व को नवान नेष्टी यज्ञ भी कहा जाता हैं मतलब  खेत से आए नए अन्न को इस दिन यज्ञ में हवन करके प्रसाद लेने की परंपरा भी चली आ रही है।

उस अन्न को होला के नाम से जाना जाता है इसी कारण इसका नाम होली का उत्सव भी पड़ा होली का पावन पर्व अपने आप में बहुत ही सुनहरा और निराला है फरवरी और मार्च में जब होली मनाई जाती है तब प्रकृति भी अनुकूल होती है पूरे वातावरण शुद्ध हो जाता है।

खेतों में काम करने वाले किसान अपनी फसल काट कर निश्चिंत हो जाते हैं मौसम अनुकूल होता है होली का पावन पर्व स्थान अनुसार अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है।

 लोग आपस की दुश्मनी को भूल कर एक दूसरे को प्यार बांटते हैं होली का पावन पर्व एक दूसरे के लिये  प्यार और परोपकार को दर्शाती है आप सभी को होली की बहुत-बहुत बधाई।

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about holi festival 2020 | होली सिर्फ रंगों का पर्व नहीं है about holi festival 2020 | होली सिर्फ रंगों का पर्व नहीं है Reviewed by Ourbhakti on March 18, 2019 Rating: 5

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