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grah shanti special | सम्पूर्ण ग्रह शांति विधि | न करे ग़लतियाँ

Nav grah shanti vidhi | नवग्रह शांति की सम्पूर्ण पूजा दान विधि

nav grah shanti kaise kare
पढ़े-लिखे लोग ग्रह शांति कभी नहीं करते नवग्रह शांति वह लोग कराते हैं जो सबसे ज्यादा अग्यानी हैं आपको क्या लगता है ग्रह शांति(grah shanti) करने से आपके बुरे दिन खत्म हो जाएंगे ?
जो नाम भर के  पंडित हैं जिनको  "पंडित" शब्द का अर्थ सही से नही पता वही लोग आजकल सबसे बड़े पंडित बने हुए हैं उनसे अगर गायत्री मंत्र भी पूछा जाए तो वह शुद्ध शुद्ध उच्चारण नहीं कर सकते और हमारे भोली भाली जनता ऐसे लोगों के चंगुल में फंस जाती है।
आज हम नवग्रह शांति के विषय में बात कर रहे हैं नवग्रह की शांति कैसे की जाती है कितने तरीकों से ग्रहों की शांति की जाती है और नवग्रह की शांति कब करवानी चाहिए इन्हीं सब विषयों को आज हम विस्तारपूर्वक जानेंगे और साथ ही पूर्ण विधि भी बताएंगे।
हम आपको यह विश्वास दिलाते हैं अगर आप हमारा यह लेख पूरा पड़ेंगे तो आपको ग्रह शान्ति के नाम पर कोई भी बेवकूफ नहीं बना पाएगा और हम जो भी बातें बताएंगे वह सब निशुल्क होगा।

Grah shanti kaise kare | नवग्रह की शांति कैसे की जाती है?

समझने वाली सबसे जरूरी बात यह है की  नवग्रहों(grah shanti)की शांति कभी नहीं करनी चाहिए अगर आपने पूरे 9 ग्रहों की शांति  कर दी तो आपके सारे ग्रह शांत हो जाएंगे जो अच्छे ग्रह हैं जिनका प्रभाव कुंडली में अच्छा है
वह भी अपना शुभ प्रभाव देने में असमर्थ हो जाएगा जो ग्रह अच्छे हैं उनकी शांति कभी ना करे क्योंकि वह पहले ही अच्छे हैं इसीलिए मैंने यह बात बोला की नौ ग्रहों की शांति(nav grah ki shanti) नहीं करनी चाहिए
शांति केवल उन्हीं ग्रहों की करे जो आपको बुरा फल दे रहे हैं जिनके कारण आपके जीवन में कठिनाइयां परेशानियां आ रही है। यहां पर नवग्रह शांति का अर्थ सिर्फ इतना ही समझना चाहिए आपके वे ग्रह जो आपको बुरा फल दे रहे हैं।

navgrah shanti k tarike |नवग्रह की शांति कितने तरीके से की जाती है?

वैसे तो नवग्रहों की शांति बहुत तरीके से होती  है कोई टोटका अपनाता है,कोई तांत्रिक पद्धत्ति से शांति करते है,कोई रत्न के माध्यम से ग्रहों की शांति करते है तो कोई वैदिक तरीके से ग्रहों की शांति कराते है।
अलग-अलग जगहों में ग्रह की शांति अपनी सुविधा के अनुसार कराया जाता है ऐसा नहीं है कि ग्रहों की शांति कराने के लिए बहुत सारे पैसे लगते हैं नवग्रह की शांति बिना पैसे खर्च किए भी हो सकती है। बस आपको सही मार्ग दर्शन की आवश्यकता चाहिये।

grah shanti kab kare |नवग्रह की शांति कब करानी चहिये

आप जब मर्जी नवग्रहों  की शांति नहीं कर सकते उसका भी एक निश्चित समय होता है यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह खराब हो 6,8,12 में बैठा हुआ हो, नीच का हो, पापी ग्रहों से दृष्ट हो, शुभ प्रभाव देने में असमर्थ हो तो उस ग्रह से संबंधित दान पूजा-पाठ  करके उस ग्रह की शांति की जाती हैं
हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वर्तमान समय में आपके ऊपर किस ग्रह की महादशा अंतर्दशा  चल रही है यदि कुंडली में कोई ग्रह अशुभ होकर बैठा हुआ है और महादशा भी उसी ग्रह का चल रहा है तो ऐसी स्थिति में संबंधित ग्रह की शांति अवश्य करानी चाहिए।

 navgrah shanti sampurna vidhi | नवग्रह शांति  सम्पूर्ण विधि

नवग्रह की शांति इन पाँच चीजों पर टिकी हुई है जप,हवन, तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन, यह शांति के 5 अंग माने जाते हैं
जो कोई भी अपने जीवन में सुखी होना चाहता है उनको  बताई गई सब क्रियाएं करनी चाहिये अगर आपको लगता हे की आप के ग्रह आपको सच में परेशान कर रहे हैं
तो आप को बताई गई बातों पर ध्यान देना होगा जप का दशांश हवन यानि ग्रहों के जप करने के बाद उसका हवन भी करना जरुरी है।
ठीक इसी प्रकार से  तर्पण का दशांश मार्जन और अंत में मार्जन का 10 अंश ब्राह्मण भोजन होता है
navgrah shanti sampurna vidhi | नवग्रह शांति सम्पूर्ण विधि
सूर्य ग्रह की शांति
 
दान योग्य सामग्री-सोना, तांबा, गेहूं, गुण, मसूर, घी , लाल वस्त्र, कमल का पुष्प, बछड़े सहित गाय और केसरी।

वैदिक मंत्र -ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन

सूर्य का तांत्रिक मंत्र-ॐ घृणि सूर्याय नमः

सूर्यग्रह का बीज मंत्र-ओम ह्रिम हौं सूर्याय नमः जप संख्या 7000 बार शिवपूजन सहित

सूर्य ग्रह के हवन के लिए-आक का  लकड़ी

यदि सूर्य की दशा में यदि माणिक्य  सूट करता हो 3 व 5 रत्ती का सोने या तांबे की अंगूठी में रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए।

चन्द्र ग्रह शांति
आप सभी लोग जानते हैं चंद्रमा मन का कारक होता है यदि चंद्रमा कुंडली में पीड़ित हो तो आदमी ज्यादा बेमतलब की चिंता करता है ऐसे में चंद्रमा को शांत करना बहुत जरूरी होता है।

चंद्रमा के लिए दान योग्य वस्तुएं-सफ़ेद कपड़ा ,सफ़ेद फूल ,मोती ,सफ़ेद चन्दन दूध ,दही ,मिस्स्री ,सोमवार शाम के समय।

चन्द्रमा वैदिक मंत्र-ॐ इमं देवाSसपत् न ग्वं सुवध्वम् महते क्षत्राय महते ज्येष्ठयाय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय इमममुष्य पुत्रमुष्यै पुत्रमस्यै विश एष  वोSमी राजा सोमोSस्माकं ब्राह्मणानां ग्वं राजा॥

चन्द्रमा का मूल मंत्र-ॐ सोम सोमाय नमः

चन्द्रमा का बीज मंत्र-ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः  जप संख्या 11000  बार देवी और शिव पूजन सहित

हवन समिधा-पलास

यदि आपको लगता हैं मोती रत्न धारण करने से चन्द्रमा ठीक होगा तो मोती रत्न 2,4,6 रत्ती का चांदी में धारण करे किसी योग्य की सलाह लेकर ।

मंगल ग्रह शांति 

मंगल ग्रह को एक सेनापति के रूप में भी देखा जाता है यदि किसी का मंगल अच्छा हो तो उसको जीवन में सफलताएं मिलती है अगर किसी का मंगल बहुत ही ज्यादा बुरा हो तो उसको अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

मंगल ग्रह का दान- मूंगा, सोना, तांबा, गेहूं, गुण, मसूर की दाल ,चाकू ,रक्त चंदन, रक्त वस्त्र।

मंगल वैदिक मंत्र -ॐ अग्निमूर्द्धा दिव: ककुपति: पृथिव्या अयम्।अपा ग्वं रेता ग्वं सि जिन्वति। इदं भौमाय, इदं न मम

तांत्रिक मंत्र- ॐ अंग अंगारकाय नमः।

बीज मंत्र- ॐ हुम् श्रीम भौमाय नमः जप संख्या दस हजार बार बार गणेश पूजन सहित।

हवन के लिए लकड़ी- खयर।

मंगल दशा में शांति के लिए मूंगा रत्न 8 रत्ती का सोने की अंगूठी में मंगलवार को अनुराधा नक्षत्र में मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए।

बुध ग्रह शांति 
 
बुध ग्रह बुद्धि का ग्रह है इसको व्यापारी ग्रह भी कहते है जिसकी कुंडली में ये ग्रह शुभ होता है वो जातक बहुत ही चुतर चालक  होता है एसे जातक दूसरों से अपना काम बहुत ही आसानी से निकालते हैं।

दान योग्य सामग्री- मूंगा , मांस, घी, हरा वस्त्र, कस्तूरी, कांच का बर्तन, कपूर ।

सामान्य मंत्र- ॐ बूम बुधाय नमः।

 बीज मंत्र- ओम श्रीम श्रीम बुधाय नमः जब संख्या 8000 बार विष्णु पूजन सहित।

 हवन समिधा- अपामार्ग ।

बुध ग्रह की शांति के लिए पन्ना रत्न 3,6 रत्ती का सोने की अंगूठी में बुधवार के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में सबसे छोटी उंगली में धारण करना चाहिए।

गुरु (वृहस्पति ) शांति

जन्म पत्री में गुरु ग्रह को सबसे शुभ माना जाता हैं ये विद्या का कारक ग्रह है जीवन में कितना पढाई लिखाई करेगा कितना तरक्की करेगा समाज में  कितना मान सम्मान पायेगा ये सब बातें इसी ग्रह तय होता है।

दान योग्य सामग्री- चीनी, नमक, हल्दी, चने की दाल, पीला धान, पीला वस्त्र, पीला फूल, पुस्तक तथा घोड़ा।

वैदिक मंत्र -ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अहार्द् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।यददीदयच्छवस ॠतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम॥

तांत्रिक मंत्र- ॐ बृ बृहस्पतए नमः जप संख्या 19 हजार हजार बार अपने कुल देवता के पूजन सहित।

हवन समिधा- पीपल

बृहस्पति ग्रह के दशा के शांति लिए पीला पुखराज एक रत्ती का सोने की अंगूठी में बृहस्पतिवार को इसे पुष्य नक्षत्र में तर्जनी उंगली में धारण करना चाहिए।

शुक्र ग्रह शांति 
 
ये ग्रह एक स्त्री कारक है इस दुनिया में सुख से जीने के लिये इस ग्रह का शुभ होना बहुत ही जरुरी हैं शुक्र शुभ होता है तो पति पत्नी में अनबन नहीं होता जो भी सुख सुविधाये इन्हें मिलती है वे इनका भरपूर मात्र में उपयोग करते है शुक्र का कमजोर होना बहुत ही अशुभ माना गया हैं।

दान योग्य वस्तु- चावल ,श्रीखंड चंदन, सफेद वस्त्र, सोना, चांदी, हीरा, दूध, दही, सफेद फूल , सुगंधित द्रब्य , सफेद घोड़ा ।

वैदिक मंत्र- ॐ अन्नात् परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय:।सोमं प्रजापति: ॠतेन सत्यमिन्द्रियं पिवानं ग्वं शुक्रमन्धसSइन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोSमृतं मधु॥

सामान्य मंत्र- ॐ शुं शुक्राय नमः।

 बीज मंत्र- ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।

शुक्र ग्रह से सम्बंधित बहुत ही सरल उपाय जानने के लिये यह पोस्ट पढ़े

शनि शांति विधि
 
शनिदेव से ही बहुत लोग डरते है या एसा कहे नाम मात्र के ढोंगी पंडित ज्योतिषी इसी ग्रह के नाम से ज्यादा डरा ते हैं जब की शनि तो कर्म के अनुसार फल देते है जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में अच्छा काम करता है उसे शनिदेव कुछ नहीं करते

 बल्कि और अच्छा बना देते है जितने भी बड़े लोग हुये है ज्यादातर इनकी ही साढ़ेसाती और ढईया  में हुये हैं इनके उपाय भी बहुत सरल हैं शनि देव का उपाय शनिवार को करने से अधिक फायदा होता हैं

दान  वस्तुएँ- साबुत उड़द, लोहा, तेल, तिल के बीज, काले कपड़े ,काला  जुत्ता  छाता

वैदिक मंत्र- ॐ शन्नो देविरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंय्योरभिस्त्रवन्तु न:।

शनि बीज मंत्र - ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः जप संख्या 23000 बार

सामान्य मंत्र -ॐ शं शनिश्चरायै नमः!

शनि के लिये 7 मुखी रुद्राक्ष भी  धारण कर सकते हैं

नित्य हनुमान चालीसा का पाठ

शनि शांति के अन्य उपाय जानने के लिये  यहाँ क्लिक करे

राहू शांति उपाय 

अचानक घटने वाली घटना में राहू की अहम् भूमिका होती है चाहे वो घटना शुभ हो या अशुभ किसी को  चोट लगना, मरना या लाटरी  सट्टा में अधिक धन पाना आदि इसलिये इस ग्रह को हमें इतना शुभ बनाना चाहिये जब भी कोई घटना घटे तो वो हमारे लिये शुभ हो

वैदिक मंत्र -ॐ कयानश्चित्र आ भुवद्वती सदा वृध: सखा।कया शचिंष्ठया वृता॥ 

तांत्रिक मंत्र-ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः जप संख्या 18000 बार

सामान्य मंत्र -ॐ रां राहवे नमः

दान की वस्तु -सरसो,जौ, सिक्का, जौ, तिल, चावल, कंगुनी,साबूत मूंग, चना, गेहूँ ,गोमेद,नीले या भूरें रंग के कपड़े, कांच

रत्न-गोमेद


केतु शांति उपाय 
 
विचलित करने वाला जीवन में धक्के खिलाने वाला ग्रह है केतु आपने एक कहावत तो सुनी होगी केत छुडाये खेत अगर वोही केतु शुभ हो जाये तो उसके नाम का झंडा लहराता है।

दान -केला, तिल के बीज, लहसुनिया रत्न, एवं काले पुष्प ,केला,काला कंबल

वैदिक मंत्र - केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मर्या अपेशसे।समुषदभिरजा यथा:।

तांत्रिक मंत्र -ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

सामान्य मंत्र-ॐ कें केतवे नमः

रत्न-लहसुनिया


अपनी बात 
आमतौर पर देखा जाए तो व्यक्ति के जीवन में दो प्रकार का समय आता है एक सुख का समय और दूसरा दुःख का समय। जातक अपने जीवन में सुख के समय को तो बहुत ही आसानी से पार कर लेता है।

 लेकिन जब उसके जीवन में कठिनाइयां परेशानियां आती है दर-दर ठोकरें खाता है तब उसे ग्रहों की याद आती है भगवान की याद आती है उसके बाद शुरू होता है सारा खेल।

आपकी लाचारी को आपके कष्ट को पाखंडी पंडित भरपूर मात्रा में फायदा उठाते हैं हमारा कहने का अर्थ यह नहीं है की सभी पंडित ख़राब होते है।

 मैं भी एक पंडित हु और पिछले कई सालो से ये काम कर रहा हु इस दुनिया में बहुत विद्वान पंडित जी भी है मैं उनको दिल से प्रणाम करता हु चंद ढोंगी पंडितो,तांत्रिक के कारण अच्छे लोगों भी बदनाम हैं।

यह लेख सिर्फ आपको जानकारी देने के लिये हैं कोई भी उपाय करने से पहले किसी योग्य पंडित ज्योतिषी से सलाह अवश्य ले।

इस लेख से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव है तो कमेंट करे ||धन्यवाद ||

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